
फसल
जनवरी माह चल रहा है और जिले के खेतों में रबी फसलें सक्रिय वृद्धि और फूल-फल की अवस्था में पहुंच चुकी हैं। गेहूं, चना, सरसों और मटर जैसी प्रमुख फसलें इस समय मौसम में हो रहे बदलाव के प्रभाव में हैं। अधिकतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि जारी रह सकती है, जो किसानों के लिए सतर्कता का संकेत है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ते तापमान का प्रारंभिक प्रभाव गेहूं की फसल में टिलरिंग यानी कल्ले निकलने या फूटान की प्रक्रिया में देखा जा रहा है। फिलहाल यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। हालांकि, यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो बालियां निकलने और दाने भरने की अवस्था प्रभावित हो सकती है। अधिक तापमान से दानों का भराव ठीक से न हो पाने की संभावना रहती है, जिससे दानों का वजन घट सकता है और कुल उपज में कमी आ सकती है।
दलहनी फसलें जैसे चना और मटर भी बढ़ते तापमान से प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक तापमान की स्थिति में फूल झडऩे की समस्या बढ़ जाती है, जिससे फलियों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही, मिट्टी में नमी की कमी होने पर पौधों की बढ़वार रुक सकती है। सरसों की फसल में तापमान बढऩे से फूल और फल बनने की अवधि कम हो सकती है, जिसका सीधे असर दाने के आकार, तेल प्रतिशत और कुल उत्पादन पर पड़ता है।
हेमंत कुमार सिन्हा कृषि मौसम वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी कि इस समय सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। दिन और रात के तापमान में बढ़ते अंतर के कारण फसलों पर शारीरिक तनाव की स्थिति बन सकती है। फूल और फल बनने की अवस्था में पानी की कमी सबसे अधिक नुकसानदायक होती है। उन्होंने कहा कि अनुशंसित मात्रा से अधिक नाइट्रोजन उर्वरक का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे फसल कमजोर होकर कीट और रोगों के प्रति संवेदनशील हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित सिंचाई, पोषक तत्वों का समुचित प्रबंधन और नियमित निगरानी अपनाकर संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस समय किसानों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे फसल की देखभाल और प्रबंधन में सतर्क रहें, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और फसल स्वस्थ रहे। छतरपुर के खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल किसानों की मेहनत और सही सिंचाई प्रबंधन के कारण अच्छी वृद्धि दिखा रही है, लेकिन विशेषज्ञों की चेतावनी स्पष्ट करती है कि बढ़ते तापमान और नमी की कमी के कारण सतर्क रहना आवश्यक है। किसान इस समय फसल पर निगरानी और आवश्यक प्रबंध करके संभावित नुकसान से बच सकते हैं।
Published on:
21 Jan 2026 11:00 am

बड़ी खबरें
View Allछतरपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
