
weekly market on street
छतरपुर। शहर में हर दिन किसी न किसी इलाके में साप्ताहिक सब्जी बाजार लगते हैं। सात दिन अगल-अलग जगह लगने वाले साप्ताहिक सब्जी बाजार तीन दिन तो नेशनल हाइवे पर ही लगते हैं, बाकी चार दिन शहर की मुख्य सड़कों पर ही बाजार लगता है। पूरे शहर में साप्ताहिक सब्जी बाजार के लिए केवल रविवार को मेला ग्राउंड और बुधवार को पुरानी गल्ला मंडी में रामचरित मानस प्रांगण में ही जगह आरक्षित है। ये जगह भी दशकों पहले जब छतरपुर की आबादी कुछ हजार हुआ करती थी, तब आरक्षित किए गए थे। समय के साथ शहर की आबादी बढ़कर लगभग तीन लाख हो गई। इसके साथ ही शहर में लगने वाले दो साप्ताहिक बाजार रविवार और बुधवार से बढ़ते गए और अब हर दिन किसी न किसी इलाके में साप्ताहिक सब्जी बाजार लगता है। लेकिन बाकी के छह दिन के लिए साप्ताहिक बाजार के लिए जगह न होने से ये बाजार सड़क किनारे ही लगते हैं। इनमें से रविवार, शुक्रवार और गुरुवार को नेशनल हाइवे पर और सोमवार, मंगलवार ,बुधवार , शनिवार को शहर के विभिन्न इलाकों की मुख्य सड़कों पर ही बाजार लगते हैं। बाजार के लिए मैदान जैसी कोई जगह न होने से हर दिन किसी न किसी इलाके में साप्ताहिक बाजार के दिन ट्रैफिक जाम लगता है।
नेशनल हाइवे पर तीन दिन बाजार से जाम
सप्ताह में तीन बार रविवार, गुरुवार और शुक्रवार को साप्ताहिक सब्जी बाजार नेशनल हाइवे किनारे लगता है। रविवार को साप्ताहिक बाजार के लिए मेला ग्राउंड में जगह निर्धारित हैं, लेकिन मेला ग्राउंड के अलावा छत्रसाल चौक से लेकर आकाशवाणी तिराहा तक नेशनल हाइवे के किनारे ही सब्जी की दुकानें सुबह से ही सज जाती है। सड़क किनारे सब्जी की दुकानें और खरीददारी के लिए आने वाले लोगों के वाहन भी सड़क पर ही पार्क होने से दिनभर जाम की स्थिति रहती है। ये हालात तब हैं, जब रविवार को साप्ताहिक अवकाश का दिन है। बाजार इलाके में वाहन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोग अपने वाहन सड़क के दोनों किनारों पर खड़े कर देते हैं। इससे हादसे का भय भी बना रहता है। ऐसी ही स्थिति रविवार को भी रही। इसके चलते दिनभर हाइवे पर जाम के हालात बने, लेकिन जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ऐसा ही हाल शुक्रवार के साप्ताहिक बाजार के दिन भी रहता है। नेशनल हाइवे के किनारे पन्ना नाका से पुलिस लाइन रोड और गल्र्स कॉलेज के सामने सब्जी बाजार लगता है। ठीक यही हालात गुरुवार को महोबा रोड पर लगने वाले साप्ताहिक बाजार के दिन भी होता है। महोबा रोड पर गुरुद्वारा के पास से लेकर मारुती शोरुम तक सड़क के किनारे ही सब्जी बाजार लगता है। इसी दौरान यहां से भारी, मध्यम वाहनों को आना जाना भी होता है, जिससे जाम और दुर्घटना के हालात बन जाते हैं।
चार दिन अन्य सड़कों पर बाजार से जाम
नेशनल हाइवे पर तीन दिन बाजार लगने के अलावा चार दिन अलग-अलग जगह सब्जी बाजार लगते हैं। सोमवार को सटई रोड पर सब्जी बाजार लगता है। ये पूरा बाजार ही सड़क के दोनों किनारे लगता है। खरीददारी करने आने वाले लोग सड़क पर ही वाहन पार्क करते और सड़क पर खड़े होकर खरीददारी करते हैं। दोपहर से देर शाम तक इस सड़क पर साप्ताहिक सब्जी बाजार के कारण जाम लगा रहता है। चार पहिया वाहन लेकर निकलना मुश्किल होता है। इसी तरह से मंगलवार को पठापुर रोड पर सब्जी बाजार लगता है। एक बड़ी आबादी को जोडऩे वाली इस सड़क पर सब्जी बाजार लगने से लोगों को दिनभर जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। बुधवार को गल्लामंड़ी में लगने वाला साप्ताहिक बाजार कई दशकों से लग रहा है। इसके लिए रामचरित मानस प्रांगण में जगह भी आरक्षित है, लेकिन आबादी बढऩे के साथ बाजार का आकार बढ़ गया और आधा बाजार गल्ला मंड़ी रोड पर ही लगने लगा। बाजार वाला इलाका होने के कारण इस सड़क पर ट्रैफिक का दबाव हमेशा रहता है। लेकिन बुधवार को इस रोड से निकलना बहुत मुश्किल होती है। इसी तरह शनिवार को संकट मोचन रोड पर साप्ताहिक सब्जी बाजार लगता है। शहर को बाईपास से जोडऩे वाली इस सड़क पर शनिवार के दिन वाहन लेकर चलना संभव नहीं हो पाता है। सकरी सड़क पर ही सब्जी दुकान और लोग रहते हैं। जिससे पूरे दिन इस सड़क पर आवागमन नहीं हो पाता है।
बाजारों के लिए जगह जरूरी
दुर्घटना और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए जरुरी है, कि न केवल नेशनल हाइवे पर लगने वाले बल्कि अन्य सड़कों पर लगने वाले बाजारों के लिए जगह देने की जरुरत है, ताकि बाजार के कारण ट्रैफिक जाम न लगे। साप्ताहिक बाजार लाइफ लाइन माने जाते हैं, इसलिए शहर के हर इलाके में बाजार लगने से लोगों को सुविधा होती है, लेकिन यही बाजार सड़क किनारे से हटाकर मैदान में लगने लगे तो ये सुविधा और भी बढ़ जाएगी। लोगों को न तो ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ेगा न ही सड़क पर बाजार होने से जाम के हालात बनेंगे। बाजार की जगह के लिए नगरपालिका को खुद ही पहल करने की जरुरत है, नगरपालिका को खुद की या फिर राजस्व या नजूल से जमीन लेकर बाजार की जगह निर्धारित करनी होगी, तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है।
शिफ्ट हो सकते हैं बाजार
शहर में नेशनल हाइवे और अन्य सड़कों पर बाजार बहुत वर्षो से लगते हैं, इससे ट्रैफिक जाम जैसी समस्या पैदा होती है। हमें नजूल से जमीन मिल जाए तो निश्चित रुप से सड़क किनारे के बाजार शिफ्ट कि ए जाएंगे। ताकि ट्रैफिक की समस्या सुधर सके।
हरिहर गंधर्व, सीएमओ
फैक्ट फाइल
साप्ताहिक बाजार - 7
नेशनल हाइवे पर बाजार - 3
अन्य सड़कों पर बाजार- 4
Published on:
23 Jan 2019 07:00 am
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