छात्र संगठन कई बार दे चुके है ज्ञापन
छिंदवाड़ा. पीजी कॉलेज में हर दिन विद्यार्थियों की जान आफत में बनी हुई है। कॉलेज कवर्ड न होने से आम सडक़ पर फर्राटा भरते वाहन विद्यार्थियों की समस्या बन गए हैं। आए दिन कोई न कोई विद्यार्थी चोटिल हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि विद्यार्थी कॉलेज को कवर्ड करने एवं निर्माण हो जाने तक सडक़ पर स्पीड ब्रेकर या फिर बैरियर लगाने की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद भी कॉलेज प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है। उल्लेखनीय है कि पीजी कॉलेज की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। तब से लेकर अब तक 55 प्राचार्य इस कॉलेज की कमान संभाल चुके हैं। वर्तमान में 56 वें प्राचार्य के तौर पर डॉ. पीआर चंदेलकर कार्यभार देख रहे हैं। कॉलेज में 11 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसके अलावा 70 से अधिक प्राध्यापक एवं कर्मचारी हैं।
प्रतिदिन औसतन 3 हजार वाहन
कैम्पस के अंदर से गुजर रही सडक़ से प्रतिदिन तीन हजार से अधिक वाहन दौड़ रहे हैं। इनमें छोटे से लेकर बड़े वाहन शामिल हैं। इन वाहनों में से अधिकतर में गति भी काफी तेज होती है। कॉलेज के पास न ही कोई स्पीड ब्रेकर लगा हुआ है और न ही स्पीड धीमा करने के लिए कोई उपाय किए गए हैं। जबकि सडक़ के एक तरफ कॉलेज का मुख्य भवन है और दूसरी तरफ पार्किंग बनी हुई है। विद्यार्थी पार्किंग में अपने वाहन खड़े करने के बाद सडक़ पार करना चाहते हैं, लेकिन तेज गति से आ रहे वाहनों को देखकर वह सहम जाते हैं। वाहन की तेज गति और आवाज उनकी धडकऩ बढ़ा रहे हैं। आए दिन विद्यार्थियों के चोटिल होने की भी घटना हो रही है।
कुछ समय तक लगाया गया था हाइटगेज
कॉलेज परिसर से गुजर रही आम सडक़ के दोनों तरफ कुछ वर्ष पहले तक बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित था। इसके लिए सडक़ के दोनों शुरुआती छोर पर हाइटगेज भी लगाया गया था, लेकिन वाहनों की आवाजाही से यह टूट गया। इसके बाद बड़े वाहनों की भी आवाजाही शुरु हो गई।
राजनीति वजह भी आ रही सामने
पीजी कॉलेज में वर्ष 2014 के बाद 2022 में नैक मूल्यांकन किया गया था। दोनों ही समय नैक टीम ने कॉलेज के कवर्ड कैम्पस न होने पर सवाल उठाए। हालांकि दोनों ही बार कॉलेज कवर्ड न होने से ग्रेड पर प्रभाव पड़ा। हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने प्रशासन से संपर्क कर कॉलेज को कवर्ड करने के प्रयास किए थे, एक दूसरा मार्ग भी खोज निकाला था। जिससे वाहनों के आने-जाने में परेशानी भी नहीं होती और कॉलेज भी कवर्ड हो जाता। इसे देखते हुए प्रशासन भी फंड देने को राजी हो गया था, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग से न अनुमति मिल पाई और न ही फंड मिल पाया। इसके अलावा राजनीति भी हावी हो गई। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इनका कहना है...
कॉलेज कैम्पस से गुजर रही सडक़ पर बैरियर संबंधी इस्तेजाम जल्द ही किए जाएंगे। कवर्ड कैम्पस को लेकर भी बातचीत की जा रही है।
डॉ. पीआर चंदेलकर, प्राचार्य, पीजी कॉलेज