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महज एक फीसद शुल्क लेने के बावजूद कृषि मंडी हुई मालामाल

मंडी को समर्थन मूल्य खरीदी करने पर सोसायटियों से भी 17 लाख रुपए की आमदनी हुई

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kusmeli mandi

कृषि उपज मंडी कुसमेली में किसानों की आमद एवं उनके लाए उपज की आवक से मिलने वाले शुल्क से इस बार भी मंडी मालामाल ही हुई है। इस साल कुसमेली मंडी की आमदनी में 19त्न की वृद्धि हुई, जबकि आवक 22त्न अधिक दर्ज की गई। मंडी को मार्च 2025 तक कुल 22 करोड़ 97 लाख 72 हजार 289 रुपए की आमदनी हुई। इसमें निराश्रित शुल्क सहित मंडी शुल्क शामिल है। इसके अलावा मंडी को समर्थन मूल्य खरीदी करने पर सोसायटियों से भी 17 लाख रुपए की आमदनी हुई।
उल्लेखनीय है कि यह आमदनी तब हुई जब मंडी प्रबंधन ने पूरे सत्र में एक फीसद टैक्स ही वसूल किया। साल 2023, अक्टूबर माह से मंडी टैक्स डेढ़ फीसद प्रति सैकड़ा से एक फीसद हो चुका है। कुसमेली मंडी को व्यापारियों से मंडी शुल्क के रूप में 19 करोड़ 99 लाख 24 हजार 401रुपए मिले, जबकि निराश्रित शुल्क के रूप में 2 करोड़ 98 लाख 46 हजार 581 रुपए प्राप्त हुए।

180877 किसानों का योगदान

मंडी को टैक्स से मालामाल करने में लगभग एक लाख 80 हजार 877 किसानों का योगदान है। इनकी 78 लाख 59 हजार 187 क्विंटल आवक से मंडी को भरपूर टैक्स मिला। इनमें खरीफ के सीजन में मक्का एवं रवी के सीजन में गेहूं को सबसे अधिक योगदान है। इनके अलावा मंडी में चना, सोयाबीन, इमली, अमचूर, महुए के फूल, मूंग, उड़द, गुल्ली, धान, आवंला, मटर, सरसों, बहेड़ा, तुअर, कुटकी, मसूर, हर्रा, अरंडी, अश्वगंधा, कुसुम, बटरी, अलसी, गुड़ आदि की आवक भी होती है।

इस तरह मिलता है मंडी को टैक्स

मंडी शुल्क कृषि उपज में लगने वाला शुल्क है। यह एक फीसद टैक्स तो स्थायी है जो कि आवक एवं भुगतान के अनुसार कम या अधिक होता रहता है। 2000 रुपए वाले मक्का पर लगने वाला 1 फीसद टैक्स 20 रुपए होगा तो, 3000 रुपए बिकने वाले गेहूं का 1 फीसद टैक्स 30 रुपए लिया जाता है। कृषि उपज का जितना अधिक भाव होगा, उतना अधिक उससे टैक्स मिलता है।

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