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खेती से बदली किस्मत- जाटाछापर के किसानों ने अपनाया नवाचार

जैविक खेती से उगाई लाल भिंडी के भाव दुगने

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परासिया(छिंदवाड़ा)। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी के तहर किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिसमें किसान भी रुचि दिखा रहे हैं। फसल विविधिकरण को बढ़ावा देने के लिए छिंदवाड़ा उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में आत्मा के बीटीएम अमित बघेल ने किसानों को नई तकनीक और नई फसलों को लगाने के सुझाव दिए। जिससे प्रभावित होकर जाटाछापर के दो किसानों ने जैविक खेती के जरिए लाल भिंडी लगाई व इसका परिणाम भी शानदार मिला।

इस भिंडी की खास बात यह है की परंपरागत हरी भिंडी की तुलना में इसकी उपज भी अधिक मिलती है। बाजार में भाव भी दोगुना तक मिलता है। खाने में स्वादिष्ट व सेहतमंद होती है।

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Vegetable Research) के मुताबिक, लाल भिंडी सेहत के मामले में किसी रामबाण से कम नहीं है। इसमें फॉलिक एसिड पाया जाता है, जो बच्चों के मानसिक विकास में सहायक होता है। लाल भिंडी में हार्ट की बीमारी, मोटापा और डायबिटीज को कंट्रोल करने की क्षमता होती है। लाल भिंडी में मौजूद आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व इसे हार्ट के लिए उपयोगी बना रहे हैं। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल को रोकने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर यह औषधीय गुणों से भरपूर होती है।

लाल रंग की भिन्डी में एंथोसायनिन पाया जाता है। इसमें विटामिन बी 9 होता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी है। इसमें खास तत्व फ ांलेट मस्तिष्क के विकास में अहम भूमिका निभाता है। भिन्डी में मौजूद पैक्टिन कोलेस्ट्रोल को कम करता है।

इसमें पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर, रक्त में कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करता हैं। साथ ही इससे हृदय रोग का खतरा भी कम होता है। इसमें पाया जाने वाला तत्व यूगेनोल मधुमेह को कम करता है इसके कारण रक्त में शर्करा का स्तर कम होता है । इसमें विटामिन, बीटा कैरोटिन, जैनथिन, लूटिन, कैल्शियम आयरन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

लाल भिंडी यूरोपीय देशों की फसल है। अब यह फसल भारत में भी होने लगी है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने इसकी देशी किस्म (red okra variety) 'काशी लालिमा' (Kashi Lalima) तैयार की है। 8-10 सालों की कड़ी मेहनत के बाद वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसे तैयार किया है।

रोग व बचाव
जानकार कहते हैं कि वैसे अन्य सब्जियों के मुकाबले लाल भिंडी में कम रोग लगते हैं। भिंडी की इस किस्म में मच्छर, इल्ली और दूसरे कीट जल्दी नहीं लगते, लेकिन इसके पौधे को लाल मकड़ी से खतरा रहता है। ये पौधों की पत्तियों के नीचे की साथ पर झुण्ड बनाकर रहने लगते हैं और इनका रस चूसते रहते हैं। इससे पौधे का विकास रुक जाता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा पीला होकर सूख जाता है। इससे बचने के लिए पौधों पर डाइकोफॉल या गंधक का सही मात्रा में छिडकाव करना चाहिए।

इसलिए भी है : सेहत का खजाना लाल भिंडी
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो लाल भिंडी (Lal bhindi) सेहत का भरपूर खजाना है। लाल भिंडी में हार्ट की बीमारी, मोटापा और डायबिटीज को कंट्रोल करने की क्षमता होती है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल को रोकने में मदद मिलती है। इसका 94 प्रतिशत पॉली अनसेचुरेटेड फैट 'बैड' कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। वहीं 66 प्रतिशत सोडियम उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को नियंत्रित करने में मददगार है। इसमें मौजूद 21 फीसद आयरन खून की कमी से जुड़ी बीमारी एनीमिया और दूसरे रोगों को दूर करती है। साथ ही प्रोटीन की 5 फीसद मात्रा शरीर के मेटाबोलिज्म सिस्टम को दुरुस्त रखती है।

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