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E-vehicle: इलेक्ट्रिक बसों का चार्जिंग स्टेशन बन जाए तो बदल सकती है छिंदवाड़ा की तस्वीर

- स्टेशन निर्माण में लग सकता है करीब तीन करोड़ रुपए का सेटअप - सरकारी व निजी क्षेत्र पहल करें तो नागपुर-भोपाल से आ सकती हैं बसें

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ELECTRIC CAR

इलेक्ट्रिक वाहनों के युग में छिंदवाड़ा में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की कमी अखर रही है। इससे दुपहिया से लेकर इलेक्ट्रिक ऑटो और कारें घरों में चार्ज हो रही है तो इलेक्ट्रिक बसें भी छिंदवाड़ा नहीं पहुंच पा रही है।
एक अनुमान के अनुसार इस चार्जिंग स्टेशन के निर्माण में करीब 3 करोड़ रुपए का खर्च आना संभावित है, जिसे न तो सरकारी एजेंसी वहन करने तैयार हैं और ना ही निजी एजेंसियां आगे आ रही है। इससे ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण लटका हुआ है। इस समय शहर समेत आसपास के इलाकों में करीब 250-500 ई-ऑटो सडक़ों पर संचालित हो रहे हैं। ये भी घरेलू बिजली पर आश्रित है। इसी तरह एक हजार ईवाहन दुपहिया है, जिनकी मजबूरी भी घरेलू चार्जिंंग पर टिकी है। बताते हैं कि नागपुर,भोपाल और इंदौर समेत अन्य इलाकों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। वहां से बसें यात्रियों को लेकर आए तो उन्हें पुन ई-चार्जिंग के लिए स्टेशन नहीं मिल पाएगा।
इससे ये बसें यहां नहीं आ पा रही है। देखा जाए तो ई-बसों का खर्चा डीजल से संचालित बसों की तुलना में बहुत है। इससे पर्यावरण भी सुरक्षित है। फिर भी इस दिशा में पहल नहीं हो पा रही है।

हर किमी यात्रा की लागत घटेगी, किराया भी सस्ता होगा

नगर निगम या फिर कोई निजी एजेंसी अगर ई-चार्जिंग स्टेशन की स्थापना कर दें तो वाहन उद्योग में नई क्रांति आ जाएगी। धीरे-धीरे बस मालिक भी ई-बसों की खरीदी की तरफ आगे बढ़ेंगे। उनकी हर किमी यात्रा की लागत भी घटेगी। इसके साथ ही यात्रियों को किराया भी सस्ता देना पड़ेगा। मेंटनेंस की लागत भी कम होगी।

बिजली कंपनी ट्रांसफार्मर लगाकर देती है

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संभागीय अभियंता खुशियाल शिववंशी के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति ई-चार्जिंंग स्टेशन के लिए आवेदन करता है तो उसे बिजली कंपनी ट्रांसफार्मर लगाकर देती है। कनेक्शन का चार्ज के साथ इसकी बिजली खपत का अलग टैरिफ प्लान है। इससे कंपनी और सेवा प्रदाता दोनों लाभ में रहेंगे।

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