
-मंतोष कुमार सिंह
मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की दशा और दिशा बेहतर करने के लिए शासन स्तर से प्रयास सुचारू रूप में नहीं होने के कारण लगातार सुविधाओं के विस्तार के बावजूद शासकीय चिकित्सालयों में गरीब जनता को समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह डॉक्टरों की कमी है, जिसे पूरा करने पर बिलकुल भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया है। हर श्रेणी के चिकित्सकों के पद खाली हैं। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 3615 पद हैं। तैनात 1936 ही हैं। इसी तरह 4134 मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत पदों की तुलना में 3434 मेडिकल ऑफिसर सेवाएं दे रहे हैं।
शासकीय अस्पताल सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं की मार भी झेल रहे हैं। छिंदवाड़ा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास है। बावजूद इसके जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन व्यवस्था बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। एक लिफ्ट खराब होने से बंद है। क्यू मैनेजमेंट सिस्टम काम नहीं कर रहा है। आगजनी से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं, उनमें कई की एक्सपायरी डेट समाप्त हो गई है।
मरीजों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन अधिकांश समय शौचालय में ताले लटके रहते हैं। सबसे ज्यादा समस्या डायलिसिस यूनिट के पास के शौचालय में देखने को मिल रही है। अस्पताल के ज्यादातर वाटर कूलर खराब पड़े हुए हैं। मरीजों को पेयजल के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। मरीज और उनके परिजनों के लिए लगाई गई कुर्सियां टूट गई हैं। वार्ड की फॉल सीलिंग लटकी हुई है। कभी भी हादसा हो सकता है।
प्रदेश के अन्य अस्पतालों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर कर उपचार के उच्चतम मानक को हासिल किया जा सकता है। मौजूदा सुविधाओं की निगरानी व्यवस्थाओं को पुख्ता बनाकर ही यह सब किया जा सकता है। प्रबंधन की मजबूती भी बहुत जरूरी होगी। इसके अलावा साधन सुविधाएं भी थोड़ी बढ़ानी होंगी, तभी मरीज यहां ज्यादा संख्या में आएंगे और उनकी निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम हो सकेगी। अभावों को दूर करके ही सबको उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
Published on:
16 Sept 2023 07:51 pm

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