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# WORLD HEALTH DAY: वाहनों का धुआं बढ़ा रहा अस्थमा

रामटेके के मुताबिक बच्चों में किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं। यही नहीं सुनने की क्षमता प्रभावित होने के अलावा यह उनके शारीरिक विकास पर भी असर डालता है। ज्यादा लेड से बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह असामान्य व्यवहार, दांतों के क्षय आदि का कारक भी है।

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mithilesh dubey

Apr 07, 2016

pollution

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छिंदवाड़ा. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हितेश रामटेके के मुताबिक वाहनों के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से छोटे बच्चों में सांस यानी अस्थमा की बीमारी बढ़ रहीं है। उन्होंने बताया कि पहले बच्चों में अस्थमा की बीमारी का औसत बेहद कम था, जो अब करीब-करीब दो गुना हो चुका है। उन्होंने बताया कि वायु में प्रदूषण का कारक अति सूक्ष्म तत्व बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसकी वजह शहर में लगातार बढ़ता जाम और वाहनों के धुंए से होने वाला वायु प्रदूषण है। रामटेके के मुताबिक बच्चों में किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं। यही नहीं सुनने की क्षमता प्रभावित होने के अलावा यह उनके शारीरिक विकास पर भी असर डालता है। ज्यादा लेड से बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह असामान्य व्यवहार, दांतों के क्षय आदि का कारक भी है।

प्रदूषण से बढ़ रहा कैंसर

कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. दीपेंद्र सलामे के मुताबिक बताते प्रदूषण से ब्लड कैंसर के रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। क्योंकि च्च्लिम्फोमा सॉलिड ट्यूमर होकर एक तरह का ब्लड कैंसर है। यह प्रदूषण और कीटनाशकों के शरीर में प्रवेश करने पर बोनमेरो में गड़बड़ी होने से होता है। इसके आलावा वायु प्रदूषण बच्चों में ब्लड कैंसर के लिए जिम्मेदार है। करीब 100 बच्चों में 24 को होने वाला ब्लड कैंसर वायु प्रदूषण से होता है।

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