छिंदवाड़ा. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हितेश रामटेके के मुताबिक वाहनों के धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण से छोटे बच्चों में सांस यानी अस्थमा की बीमारी बढ़ रहीं है। उन्होंने बताया कि पहले बच्चों में अस्थमा की बीमारी का औसत बेहद कम था, जो अब करीब-करीब दो गुना हो चुका है। उन्होंने बताया कि वायु में प्रदूषण का कारक अति सूक्ष्म तत्व बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसकी वजह शहर में लगातार बढ़ता जाम और वाहनों के धुंए से होने वाला वायु प्रदूषण है। रामटेके के मुताबिक बच्चों में किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं। यही नहीं सुनने की क्षमता प्रभावित होने के अलावा यह उनके शारीरिक विकास पर भी असर डालता है। ज्यादा लेड से बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह असामान्य व्यवहार, दांतों के क्षय आदि का कारक भी है।