आईआईटी इंदौर से प्रशिक्षण लेकर वापस लौटे नोडल अधिकारी, सांझा किया अनुभव
छिंदवाड़ा. शासन द्वारा शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा सहित प्रदेश के 19 स्वशासी कॉलेज में खोले जा रहे इन्क्यूबेशन सेंटर के लिए आईआईटी इंदौर में नोडल अधिकारी की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें पीजी कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. बीके डेहरिया भी सम्मिलित हुए। आईआईटी मुम्बई, दिल्ली के प्रोफेसर्स, जयपुर तथा पूर्व से स्थापित विभिन्न इन्क्यूबेशन सेण्टर्स के सीईओ, डाईरेक्टर्स, मैंनेजर्स ने इन्क्यूबेशन सेण्टर्स के मुख्य कार्यों को विस्तार से समझाया। लीगल एडवाइजर्स एवं सीए ने प्रक्रिया की विधि संबंधी जानकारी दी। उद्योगपतियों ने अपने स्टार्टअप के अनुभवों को सांझा किया। यह सीख दी कि नए उद्यमी कहां-कहां गलती करते हैं, आप उन्हें कैसे सचेत करें। इन्क्यूबेशन सेण्टर के नोडल ऑफिसर्स का मुख्य कार्य यह है कि वे अपने विद्यार्थियों में से उन विद्यार्थियों की पहचान करें जो नई सोच के साथ अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं। ऐसे एंटरप्रेन्योर के उस विचार को गंभीरतापूर्वक सुनना, समझना, विश्लेषण करना, विशेषज्ञों से सलाह करना, उद्योग के लिए प्रारम्भिक पूंजी की व्यवस्था करना है। इसके अलावा सेंटर का कार्य है कि वह व्यापार की सतत निगरानी करते हुए समय-समय पर तकनीकी, आर्थिक विधि संबंधी एवं व्यवहारिक समस्याओं में एंटरप्रेन्योर की तब तक सहायता करे, जब तक वह लगातार लाभ का व्यवसाय करने में सक्षम न हो जाए। इन्क्यूबेशन सेण्टर के नोडल ऑफिसर्स का मुख्य कार्य यह भी है कि वह अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय व स्थानीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के ऐसे विशेषज्ञों का पैनल हमेशा तैयार रखे जो आवश्यकता पडऩे पर सहायता के लिए सदैव उपलब्ध हो सके।
करना होगा वार्षिक कैलेंडर का पालन
इन्क्यूबेशन सेण्टर को वार्षिक कैलेण्डर का पालन करना होगा। इसमें एण्टरप्रेन्योर के लिए कैम्प, सीड फंडिंग कैम्प, ई-सेल ट्रेनिंग प्रोग्राम, इन्क्यूबेशन प्रोग्राम करना होता है। छिंदवाडा जिले में संतरा, मक्का, कपास, सब्जी फसलों मिलेट्स के उत्पादन एवं प्रसंस्करण तथा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध वनोपजों में स्टार्ट अप की अनंत सम्भवानाओं को कार्यशाला में विशेषज्ञों ने पहचाना। नोडल अधिकारी ने छिंदवाडा जिले में इन स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने के लिए की गई पूर्व तैयारियों को समझाया।
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