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छिंदवाड़ा. जिले में अब तक गेहूं,सोयाबीन, मक्का,चना जैसे बड़े दानों की फसल पर ही जोर दिया जाता रहा है। इस वजह से दूसरी फसलों पर ध्यान कम दिया गया जो इनसे भी ज्यादा गुणवत्तापूर्ण तरीके से जिले में हो रही है और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। जिले में उनका उत्पादन जैविक रूप से भी हो रहा है। परंपरागत खेती से हटकर नवाचार और नए प्रयोग के साथ दूसरे अनाजों की तरफ ध्यान देने के लिए इन दिनों जिले में विशेष नीति बन रही है। इसमें छोटे अनाज यानि मिलेट्स का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन बढ़ाने और उनको बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं ढूंढी जा रही है। जिले की इन फसलों को अब मुख्य फसलें बनाकर इनपर ध्यान केंद्रित करने सरकार और विभाग नीति बना रही है। जिले में इन फसलों का उत्पादन तो आने वाले सालों में बढ़ाया जाएगा ही, उत्पादन करने वाले किसानों को बजार में इनका मूल्य भी अच्छा मिले इसकी नीति अनाई जाएगी। मुख्यमंत्री लेंगे विशेष बैठक इस प्रोजेक्टर पर मुख्यमंत्री कमलनाथ विशेष बैठक पांच तारीख को लेने वाले हैं। इसकी तैयारियां कृषि विभाग कर रहा है। मुख्यमंत्री शिकारपुर में शाम को विभागी के स्थानीय अधिकारी विशेषज्ञों और कृषि विभाग के उच्चअधिकारियों की एक बैठक लेने वाले हैं। इस संबंध में जिले में वर्तमान में जहां उत्पादन किया जा रहा है उसकी पूरी जानकारी सीएम के सामने रखी जाएगी। ध्यान रहे जिले में कोदो- कुटकी के साथ सवां की खेती पचास हजार एकड़ से ज्यादा के क्षेत्र में होती है लेकिन ये अनाज बाजार में मुख्य मांग नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावा ज्वार, बाजरा और रागी का रकबा भी लगभग 35 हजार एकड़ में है।
क्यों दिया जा रहा ध्यान
छोटे अनाज का उत्पादन जिले में कुछ विशेष क्षेत्र में ही सीमित होकर रह गया है। दरअसल इनका भी अच्छा बाजार खड़ा किया जा सकता है। इनकी तरफ ध्यान इसलिए भी आया क्योंकि मिलेट्स के उत्पादन के लिए रासायनिक खाद, कीटनाशक और उर्वरक बेहद कम मात्रा में लगता है इस हिसाब से ये बाईडिफाल्ट जैविक रूप में उत्पादित किए जा रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार इनमें डायबिटीज, एनिमिया, लीवर संबंधी समस्या,अस्थमा मोटापे से बचाने वाले गुण है। इन अनाजों में प्रोटीन, फाइबर, बी काम्पलेक्स,अमीनो एसिड, फोलिक एसिड, विटामिन ई,मैग्निशियम, कैश्यिम, फास्फोरस, जिंक, कापर और पैटेशियम पाया जाता है। चिकित्सकीय सलाह में इन अनाजों का सेवन करने की सलाह दी जा रही है। यही कारण है इनके उत्पादन को बढ़ाने अब विभाग और सरकार का ध्यान जा रहा है।
Updated on:
04 Jan 2020 11:52 am
Published on:
04 Jan 2020 11:38 am

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