कुसमेली मंडी ने बनाया रिकॉर्ड: गत वर्ष की तुलना में हुई कमाई ने मंडी को प्रदेश के पटल पर ला दिया
छिंदवाड़ा। कोरोना संकट एवं मॉडल एक्ट से उबरने के बाद छिंदवाड़ा मंडी का प्रदर्शन काफी सुधर गया है। छिंदवाड़ा जिला सहित आसपास के किसानों की पहली पसंद बन चुकी कुसमेली मंडी ने इस सत्र 2021-22 में जमकर कमाई की। गत वर्ष की तुलना में हुई कमाई ने मंडी को प्रदेश के पटल पर ला दिया है।
जानकारी के अनुसार इस बार की कमाई के चलते आय में 156.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि मंडी द्वारा सत्र 2021-22 का कुल बजट ही 15 करोड़ रुपए के नीचे बनाया गया था।
मंडी जानकारों की मानें तो इस बार जिले में उत्पादन के साथ-साथ, फसलों के अच्छे दामों के कारण मंडी में आमदनी बढ़ी है। व्यापारियों द्वारा नकद भुगतान की सुविधा एवं नीलामी में पारदर्शिता ने भी मंडी की आवक को बढ़ाया है। पिछले साल सत्र 2020-21 कोरोना संक्रमण की पहली लहर के साथ, मॉडल एक्ट के नियम ने मंडी के कारोबार को जमकर प्रभावित किया था।
मॉडल एक्ट के नियम के कारण मंडी परिसर में खरीदी-बिक्री का नियम शिथिल हो गया था। इसके कारण आवक भी काफी कम हो गई थी। जनवरी 2021 में मॉडल एक्ट के स्थगित करने के बाद मंडी परिसर में अनाज खरीद बिक्री की बाध्यता पुन: लागू हो गई थी।
इनका कहना है
तीन बड़े कारणों से इस साल मंडी की कमाई में इजाफा हुआ है। इस साल सत्र के शुरू होने के पहले ही कृषि कानून को स्थगित कर दिया गया था। इससे मंडी परिसर के बाहर जाने वाली उपज मंडी में पहुंचने लगी। फसलों के मूल्य बढ़े और अधिक से अधिक किसानों ने
मूल्यवृद्धि के फायदे के लिए मंडी में आमद दी।
प्रतीक शुक्ला, अध्यक्ष छिंदवाड़ा अनाज व्यापारी संघ
जिले में इस बार अच्छा उत्पादन हुआ। साथ ही दूसरी मंडियों की तुलना में किसानों को दाम अधिक मिले। नकद भुगतान की सुविधा मिली। समय पर नीलामी करवाने का फायदा भी किसान को मिला। इसके लिए मंडी स्टाफ ने भी अपनी ड्यूटी निभाई। आमदनी में इजाफा सभी कारणों के परिणाम स्वरूप हुआ।
सुरेश कुमार परते, सचिव कृषि उपज मंडी, कुसमेली
ऐसे तय होता है मंडी शुल्क
मंडी में आने वाली उपज की नीलामी होती है, जिसके बाद उसकी तौल एवं भुगतान तैयार किया जाता है। भुगतान पत्रक में किसानों को दिए गए भुगतान के आधार पर मंडी में शुल्क निर्धारित होता है। यदि उपज की दरें अधिक हैं तो उतनी ही मात्रा के उपज का भुगतान अधिक होगा और उसका मंडी शुल्क भी अधिक देय होगा। इस साल मक्का की दरें जहां 1400-1500 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे नहीं गई, वहीं अधिकतम 2200 रुपए प्रति क्विंटल भी भाव किसानों को मिले। जबकि मार्च के पूरे महीने में गेहूं के भाव रिकॉर्ड स्तर 2477 रुपए प्रति क्विंटल तक के दाम पहुंचे। मंडी नियमों के अनुसार उपज के दाम व भुगतान उसकी आय को बढ़ाते और घटाते हैं।