माता भारत छोड़ो आंदोलन में भी शामिल रहीं। इनके पिता भी सेनानी। मां भी कई बार अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में जेल गईं। माताजी ने 1947 के जातीय दंगों में तीन लोगों को दंगाइयों से बचाया, उनमें एक अचला सचदेव, दूसरे बलराज साहनी और तीसरे साहिर लुधियानवी थे। आजादी की लड़ाई के चलते उन्होंने लाहौर में चल रही अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई अधूरी ही छोड़ दी। पांच मई 1970 में गुजरात राज्य के नारगोल में सहस्तरार खोला और विश्व को सहजयोग की देन दी। आज विश्व के 152 देशों में सहजयोग फैला हुआ है। विश्व के इन देशों में माताजी को कई सम्मान भी प्राप्त हुए।