मुद्दा शहर की सफाई व्यवस्था का, स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के मद्देनजर लिए गए थे निर्णय
छिंदवाड़ा। शहर की सफाई के लिए नगर निगम ने पिछले दिनों में कई प्रयोग करने की योजनाएं बनाई, लेकिन उन्हें अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इसके चलते इस बार भी स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की तैयारियों में नवाचार होने की उम्मीद कम ही है।
निगम की स्वच्छता कंसल्टेंसी एजेंसी फ्यूजन ने गत वर्षों में प्लास्टिक से कमाई, कचरा कलेक्शन वाहनों में क्यूआर कोड तक लगाने की योजना बनाई थी। वहीं इस वर्ष निगम ने स्वीपिंग मशीन लाने से लेकर कचरा कलेक्शन वाहनों को इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में बदलने की योजना बनाई, लेकिन अभी तक इन योजनाओं को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। तत्कालीन निगम आयुक्त हिमांशु सिंह के स्थानांतरण के बाद कचरा कलेक्शन वाहनों को इ-वाहन को बदलने की योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।
डीजल पर खर्च होती है बड़ी राशि
कचरा कलेक्शन वाहनों सहित निगम के सभी वाहनों में हर दिन 1500 लीटर डीजल की खपत होती है। इलेक्ट्रिक किट लगने के बाद कम से कम निगम के आधा सैकड़ा से अधिक कचरा कलेक्शन वाहनों में डीजल की जरूरत नहीं पड़ेगी। तत्कालीन निगम आयुक्त हिमांशु सिंह ने बताया था कि एक कचरा कलेक्शन वाहन को इ-वाहन में बदलने के लिए करीब ढाई से तीन लाख रुपए तक खर्च होंगे। इस राशि को खर्च करने के बाद डीजल के खर्च में बचत हो सकेगी। उन्होंने ऐसे आधा दर्जन वाहनों में शुरुआती प्रयोग की बात कही थी।
स्वीपिंग मशीन लाने की तैयारी
दो माह पहले निगम ने शहर की बड़ी सडक़ों की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन लाने की तैयारी की थी। वह तैयारी अभी भी तैयारी के मोड में ही है। स्वच्छता कर्मचारियों के भरोसे शहर की सफाई के हालात खुद निगम आयुक्त दो दिन पहले ही देख चुके हैं। दो वार्डों के निरीक्षण के दौरान 27 सफाई कर्मचारी गायब मिले। इस पर एक दिन का वेतन तक काटने के आदेश दिए जा चुके हैं। ऐसे में स्वीपिंग मशीन लाने की जरूरत बढ़ती जा रही है।
क्यूआर कोड योजना भी हुई असफल
निगम गत वर्ष सभी कचरा कलेक्शन वाहनों एवं सभी सम्पत्ति करदाताओं के घरों में क्यूआर कोड लगाने वाला था। इस योजना को निगम के स्वच्छता कंसल्टेंसी एजेंसी फ्यूजन ने बनाया था। उद्देश्य था कि कचरा कलेक्शन वाहन प्रत्येक घर में पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज हो, लेकिन इस योजना को अमलीजामा पहनाने में एजेंसी सहित निगम असफल हो चुका है।
इनका कहना है
स्वीपिंग मशीन के लिए कोटेशन निकाला जाएगा। किराए से लेने की बजाय मशीन को खरीदा जाएगा। कचरा कलेक्शन वाहनों के मोडिफिकेशन के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। परिवर्तन के लिए पहले ही पुराने हो चुके दर्जनभर कंडम ट्रैक्टरों को हटाया जा चुका है।
विक्रम अहके, महापौर छिंदवाड़ा