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कागज में प्लांटेशन, उस पर निकल गए पानी के बिल

पूर्व वनमण्डल के अधिकारियों ने कागज में दर्शाया, पौधों की निंदाई के नाम पर भी राशि निकाली
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छिंदवाड़ा

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manohar soni

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Updated: 27 Apr 2018, 11:40 AM IST

plantation

Confusion about planting


छिंदवाड़ा.पूर्व वनमण्डल के अधिकारी-कर्मचारियों ने बाइपास रोड में छिंदवाड़ा-उमरानाला के बीच पौधे तो ठीक ढंग से नहीं लगाए, उस पर ५० टैंकर पानी के नाम पर बिल निकाल लिया। इसके साथ ही पौधों के आसपास उगी झाडि़यों की निंदाई को कागज पर दर्शा दिया। यदि ईमानदारी से इस पर ५० फीसदी भी काम हो जाता तो पौधे लहलहा उठता और पर्यावरण में भी सुधार हो जाता। एक भ्रष्ट सोच ने इस पूरे प्लांटेशन को मटियामेट कर दिया।
'पत्रिकाÓ द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम में तत्कालीन मुख्य वनसंरक्षक चितरंजन त्यागी द्वारा स्वीकृत १.८३ करोड़ रुपए की कार्ययोजना पर अवलोकन किया जाए तो द्वितीय वर्ष की कार्ययोजना में स्पष्ट तौर पर ५९९० पौधों की सिंचाई के लिए ५० टैंकर पानी को एक हजार रुपए ट्रिप के हिसाब से दर्शाया गया और उस पर ५० हजार रुपए का खर्च बताया गया। इस सिंचाई के नाम पर १७७६० रुपए मजदूर के नाम बताए गए। इसके अलावा पौधे के आसपास की झाडि़यों की निंदाई के लिए ३० हजार और पौधों में डीएपी खाद ७६८० रुपए तथा पौधों की सुरक्षा करने वाले एक मजदूर को पूरे साल ५६ हजार १६० रुपए दिए गए। इस तरह एक साल में सिंचाई,खाद और सुरक्षा के नाम पर १.६१ लाख रुपए से ज्यादा का बिल बनाया गया। एेसे बिल लगातार पांच साल तक निकलते रहेंगे। इस राशि के हिसाब से बाइपास रोड के किनारे कहीं-कहीं पड़े मृत पौधों को देख लिया जाए तो निश्चित ही हर कोई बेईमान अधिकारी-कर्मचारियों को लानत् ही देगा। आखिर उन्होंने चंद स्वार्थ के लिए पर्यावरण की बलि चढ़ा दी। जिसकी ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए सख्त आवश्यकता है।
इससे पहले हम बता चुके हैं कि इस प्लांटेशन में हरित विकास प्राधिकरण की गाइड लाइन के उल्लंघन भी हुआ। प्राधिकरण ने पांच साल में एक पौधे पर १६५० रुपए खर्च की समय सीमा तय की थी लेकिन पूर्व वनमण्डल के अधिकारी-कर्मचारियों ने ३१५० रुपए प्रति पौधे का प्लान बनाया और उसकी तकनीकी स्वीकृति भी हासिल कर ली। उसके बाद मैदानी स्तर पर भी काम नहीं कराया और दो साल में एक करोड़ रुपए भी खर्च कर लिया। विभागीय सूत्रों की माने तो केन्द्रीय मंत्री एवं हरित विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सितम्बर २०१६ में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर पौधे लगाने की योजना बनाई थी। इस योजना में पांच साल तक एक पौधे पर १६५० रुपए खर्च की सीमा निर्धारित की थी। पूर्व वनमण्डल के अधिकारियों ने प्राधिकरण के इस नियम का उल्लंघन किया।