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स्कूल ड्रेस-किताबें चाहिए थी, इसलिए कलेक्टर के लिए लाई मिठाई

जनसुनवाई में पहुंची चौरई की गरीब छात्रा, कहा- घर के हालात नहीं पढऩे लायक

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Mantosh Kumar Singh

Jul 20, 2016

chhindwara

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छिंदवाड़ा . 'सर, मुझे स्कूली ड्रेस और किताब-कॉपी के लिए पैसे चाहिए' यह कहते ही एक बालिका ने अपने साथ लाई मिठाई मंगलवार को जनसुनवाई ले रहे कलेक्टर जेके जैन के सामने रख दी। इससे वे आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने बालिका के अबोध मन को भांपते हुए उस मिठाई को उपस्थित लोगों में बांटने के लिए कहा। उसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बालिका के लिए ड्रेस-पुस्तक का इंतजाम करने के आदेश दिए।यह बालिका आफरीन मंसूरी चौरई उत्कृष्ट विद्यालय में कक्षा 9वीं की छात्रा है। उसने बताया कि उसके पिता शेख शरीफ विकलांग हंै और मां दूसरे के घरों में काम करती है। दो छोटे भाई-बहन और होने से घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। वह पढऩा चाहती है।
पिछली बार कलेक्टर के आदेश पर उसका एडमिशन उत्कृष्ट विद्यालय में हो गया। अब डे्रस, कापी-किताबों की समस्या आ रही है। किसी ने उसे फिर कलेक्टर के पास जाने की सलाह दी तो उसने मिठाई लेकर जनसुनवाई में आना उचित समझा। जनसुनवाई में उपस्थित शिक्षा विभाग के अधिकारी ने उत्कृष्ट विद्यालय चौरई के प्राचार्य से बात की और बालिका को ये सामान देने के लिए कहा है। इस बालिका की स्थिति को देखकर जनसुनवाई में आए लोगों की आंखों में भी आंसू छलक आए।
इधर चौरई में सत्ता से जुड़े सक्षम जनप्रतिनिधि, अफसर और स्वयंसेवी संस्थाएं हैं। ये चाहे तो अपने स्वेच्छानुदान मद या फिर फंड से जरूरतमंद गरीबों की दो-चार हजार रुपए की मदद कर सकते हैं। सरकारी स्कूलों में पहुंचकर गरीब बच्चों के लिए अलग से फंड दे सकते हैं। इसके बावजूद भी अभी तक इन्होंने एेसी कोई पहल नहीं की है। केवल अपने समर्थकों और चाटुकारों की मदद करते ही इन्हें देखा जा सकता है।

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