6 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चतुर्थी पर इस समय करें श्रीगणेश की स्थापना

सितम्बर की पांच तारीख से गणेश उत्सव प्रारम्भ होने जा रहा है। जिसको लेकर लोगों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। इतना ही नहीं लोगों ने अभी से गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए अपना समय व पंडि़त भी बुक कर दिया है।

2 min read
Google source verification

image

Prashant Sahare

Aug 29, 2016

God and the gods of vehicles

God and the gods of vehicles

छिंदवाड़ा।
सितम्बर की पांच तारीख से गणेश उत्सव प्रारम्भ होने जा रहा है। जिसको लेकर लोगों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। इतना ही नहीं लोगों ने अभी से गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए अपना समय व पंडि़त भी बुक कर दिया है। इस बार गणेश चतुर्थीं पांच सितंबर को है परन्तु इस बार गणेश चतुर्थीं पर भद्रा रहेगी। इस दिन सुबह 7.58 बजे से भद्रा आरंभ होगी जो रात 9.04 बजे समाप्त होगी। ज्योतिष के अनुसार भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य एवं प्रतिमा स्थापना शुभ नहीं मानी जाती है अत: चतुर्थी पर भद्रा काल को छोड़कर गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए 6.15 से 7.45 बजे तक अमृत का चौघडिय़ां सबसे सर्वश्रेष्ठ रहेगा।


प्रथम पूज्य देव माने गए है गणेश

हालांकि बहुत से पंडितों के अनुसार गणेश जी चूंकि प्रथम पूज्य देव माने गए हैं, इसलिए गणेश स्थापना में कोई मुहूर्त नहीं देखा जाता है। ऐसे में लोग दोपहर में 12.15 से एक बजे तक अभिजीत मुहूर्त, दोपहर 3 से शाम 4.30 बजे तक लाभ व शाम 4.30 से 6 बजे तक अमृत के चौघडिय़ा में भी प्रतिमा स्थापना कर सकते हैं। जो लोग भद्रा काल को नहीं मानते, वे दोपहर में अभिजीत मुहूर्त अथवा शाम को लाभ अमृत के चौघडिय़ा में भी प्रतिमा की स्थापना कर सकते हैं।



इस तरह होती है श्रीगणेश की पूजा

गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान-ध्यान आदि से निवृत हो स्वच्छ, धुले हुए कपड़े पहन कर शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें। भगवान गणपति की प्रतिमा लें तथा उन्हें धूप, पुष्प, दीप, तिलक, आदि अपिज़्त कर पूजा करें। यथाविधि भगवान की आरती करें तथा उनकी घर में स्थापना करें। भगवान को लड्डू का भोग चढ़ाएं। इसके बाद वहीं आसन पर बैठ कर निम्न मंत्र का जप करें।


इस मंत्र का करे रोजना जाप

ऊँ गं गणपतये नम: इस मंत्र का कम से कम एक माला जप करें। पूजा के अंत में भगवान से पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुए गलतियों के लिए क्षमा मांगे तथा उनसे अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थ ना करें।


ये भी पढ़ें

image