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एक स्कूल ऐसा भी : खेलने की ललक बच्चों को बना रही होशियार, घर लौटने का मन ही नहीं होता

- प्राथमिक शाला धूसावानी में शिक्षक दम्पती का प्रयास - कक्षा की दीवारों में ही उकेर दिए हैं गणित, अंगे्रजी, हिंदी, पर्यावरण विषय

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primary school Dhusawani

कक्षा की दीवारों पर बनाई गई कलाकृतियों से विद्यार्थियों को किया जाता है शिक्षित।

अक्सर स्कूल की छुट्टी होने पर बच्चे खुशी-खुशी घर की ओर भागते हैं, लेकिन जिले में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां बच्चे स्कूल जाने के लिए लालायित रहते हैं। यह है जिले के तामिया विकासखंड के ग्राम धूसावानी का शासकीय प्राथमिक स्कूल। यहां बच्चों को खेलने की ललक ही उन्हें होशियार बना रही है।

छत में सौरमंडल, फर्श पर सांप-सीढ़ी

स्कूल में कुल 49 बच्चे दर्ज हैं। भवन में पांच कमरे हैं। इनमें दो कमरे ऐसे हैं, जहां स्कूल बैग की जरूरत ही नहीं। कक्षा की दीवार, फर्श एवं छत में विषयों की जानकारी उकेरी गई है। इन कमरों में एक ब्लैकबोर्ड है, जिसमें बच्चे चाक लेकर खुद ब खुद पढ़ाई करते हैं। रेलगाड़ी, सांप-सीढ़ी, लूडो, सौरमंडल आदि से सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। इस तरह की अनूठी पढ़ाई करवाने वाले स्कूल में सिर्फ दो ही शिक्षक हैं। अरविंद कुमार सोनी एवं उनकी पत्नी नीतू सोनी। अरविंद कुमार सोनी ने स्कूल में यह सारी व्यवस्था अपने दो माह का वेतन खर्च करके की है। लगातार तीन माह तक विषयों से संबंधित खेल चित्र बनवाए। अरविंद का कहना है कि इस तरह के टीएलएम कक्ष से पढ़ाई में काफी कमजोर स्तर के बच्चों का भी मन लग जाता है। उन्होंने बताया कि दो शिक्षक पांच क्लासों को इस नवाचार से आसानी से पढ़ा सकते हैं।

लूडो से सीखते हैं पहाड़े

यहां बच्चे लूडो एवं सांप सीढ़ी से गिनती एवं पहाड़े सीखते हैं। फर्श पर बनी सांप-सीढ़ी में चलने के लिए फुटबॉल नुमा पांसा डालते ही बच्चा खुद ही गिनती के अक्षर जोर से चिल्लाता है, जिसे नहीं आता उसके लिए दूसरे बच्चे मददगार बनते हैं। लूडो के लिए दो पांसे इस्तेमाल करके खुलने वाले दो छोटे अक्षरों का गुणा करके आसानी से पहाड़े सीख रहे हैं। अरविंद सोनी ने बताया कि तीसरी से पांचवीं तक के बच्चे हजार, लाख एवं सैकड़ा तक की संख्या आसानी से बता सकते हैं। 100 तक की अंग्रेजी की स्पेलिंग याद कराई जाती है। रेलगाड़ी का चित्र बनाकर 26 डिब्बों से अंग्रेजी एवं हिंदी के अंक आसानी से सिखाए जाते हैं।

इनका कहना है

धूसावानी में 2012 से पदस्थ हूं। कुछ साल तक बच्चों को पढ़ाने के बाद उनमें रुचि की कमी देखी तो 2019 में यह विचार आया कि खेल-खेल में पढ़ाई करवाई जाए। इसके बाद सकारात्मक परिणाम आने लगे। उनकी लगन देखकर ही खुशी मिलती है।
अरविंद कुमार सोनी, प्राथमिक शिक्षक धूसावानी

पिछले दिनों स्कूलों के निरीक्षण में एपीसी भानु गुमाश्ता के साथ धूसावानी गया था। जहां पर कक्षा के कमरे में ही पूरी अध्यापन सामग्री उकेरी हुई है। बच्चे करोड़ तक की संख्या जानते हैं। ऐसी व्यवस्था से छात्र को जबरदस्ती पढ़ाने का तनाव काफी कम हो जाता है।
संकेत कुमार जैन, एपीसी अकादमिक छिंदवाड़ा

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