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World Tiger Day: सतपुड़ा की बाघिन ऐसी मेहमान… आरामगाह ढूंढने लेना पड़ता है पुराने एंटीना का सहारा

World Tiger Day: दमुआ के जंगलों में तीन माह से कर रही चहलकदमी, दहाड़ते ही पता लग जाती है लोकेशन

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Tiger Conservation

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मनोहर सोनी
छिंदवाड़ा/ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से आई बाघिन ऐसी मेहमान है जिसकी आरामगाह ढूंढने के लिए वन विभाग को पुराने एंटीना का सहारा लेना पड़ता है। कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत से दमुआ के जंगलों में विचरण कर रही इस वन्यप्राणी को शिकार से बचाने विभागीय कर्मचारियों की लम्बी चौड़ी फौज को लगाना पड़ा है। जैसे ही ये दहाड़ती या चहलकदमी करती है, वैसे ही अमला आधा किमी के क्षेत्र में पहुंच जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई के मौके पर इस बाघिन के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को याद रखना होगा। तब जब तेजी से इनके कुनबों पर शिकारियों की निगाहें हैं। बताते हैं कियह बाघिन इतनी आक्रामक है, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों को इसे पिंजरे में रखना पड़ा। फिर वन विहार में पहुंचाना पड़ा। जैसे ही जंगल में छोड़ा गया तो यह छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव-तामिया से लगी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सीमाओं को छोड़ते हुए अप्रैल से दमुआ क्षेत्र के जंगलों में पहुंची। तब से उसकी लोकेशन आसपास के जंगलों में मिलती है।
इस बाघिन की निगरानी के लिए विभागीय कर्मचारियों को पुराने एंटीना का उपयोग करना पड़ता है। जैसे ही बाघिन की कॉलर आइडी में हार्ट बीट या फिर दहाडऩे की आवाज आती है, एंटीना उसे कैच कर तुरंत विशेष मॉनिटर को संदेश देता है। इससे पता लग जाता है कि उनकी मेहमान आधा किमी के क्षेत्र में चहलकदमी कर रही है। फिलहाल इससे उसे शिकारियों की निगाहों से बचाने की कोशिश हो रही है।

इनका कहना है
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से आई बाघिन की लोकेशन पर नजर रखने एंटीना का उपयोग किया जा रहा है। इससे विभाग को उसे शिकारियों से बचाने में मदद मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर इस प्रयास को सराहना होगा।
- आलोक पाठक, डीएफओ, पश्चिम वन मण्डल छिंदवाड़ा


पेंच और सतपुड़ा के बीच छिंदवाड़ा से गुजरता है कॉरीडोर
छिंदवाड़ा जिले की सीमाओं के एक तरफ पेंच नेशनल पार्क है तो वहीं दूसरी तरफ सतपुड़ा टाइगर रिजर्व। इन दोनों के बीच बाघों के आपस गुजरने के अंदरुनी जंगली मार्ग को टाइगर कारीडोर का नाम दिया गया है। इस लिहाज से छिंदवाड़ा वन विभाग की दृष्टि में संवेदनशील है। वन अधिकारी बताते हैं कि पेंच पार्क में इस समय करीब 66 बाघ है तो सतपुड़ा में यह संख्या 50 के आसपास है। दोनों पार्क के टाइगर बिछुआ से लेकर तामिया और जुन्नारदेव के रास्ते चहलकदमी करते हैं। बाघ एक दिन में अधिकतम 25 किमी तक चल सकता है।


जिले की चारों दिशाओं में बाघ का दखल

पेंच पार्क के बफर जोन में शामिल कुम्भपानी और बिछुआ रेंज के एक हिस्से में टाइगर का मूवमेंट है तो वहीं चौरई के हलाल से जुड़े जंगल में बाघ की दहाड़ सुनाई देती है। इसके अलावा परासिया,तामिया और झिरपा से जुड़े सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में भी यह वन्य प्राणी दखल रखता है। दक्षिण में सिल्लेवानी और सौंसर का जंगल टाइगर के लिए महफूज है।

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