टॉप क्रिमिनल्स की लिस्ट साझा करने के बाद यूपी व् एमपी पुलिस बीहड़ों में चहलकदमी करते हुए कुख्यात डकैतों को राडार पर लेने की कोशिश कर रही है
चित्रकूट: मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अराजक तत्वों अपराधियों व् दस्यु गैंगों को ट्रेस करने के अभियान के तहत दोनों राज्यों(यूपी एमपी) की पुलिस एक्टिव मोड में दिख रही है. टॉप क्रिमिनल्स की लिस्ट साझा करने के बाद यूपी व् एमपी पुलिस बीहड़ों में चहलकदमी करते हुए कुख्यात डकैतों को राडार पर लेने की कोशिश कर रही है. चित्रकूट के बीहड़ों से लगे मध्य प्रदेश के रीवा, सतना व् पन्ना जनपद के बीहड़ों जंगलों तक खाकी का सर्च ऑपरेशन जारी है. चित्रकूट पुलिस की कई टीमें डकैतों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए बियावान जंगलों में कॉम्बिंग कर रही हैं.
कुख्यात बबुली की तलाश में पन्ना के जंगलों तक पहुंची खाकी
कई जघन्य वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को खुली चुनौती दे चुके साढ़े पांच लाख के इनामी कुख्यात दस्यु सरगना बबुली कोल की तलाश में चित्रकूट व सतना पुलिस पन्ना(मध्य प्रदेश) के जंगलों तक पहुंच गई. दरअसल चित्रकूट पुलिस को पन्ना के जंगलों में डकैत बबुली के होने की सूचना मिली. सूचना पर एसपी मनोज कुमार झा के निर्देश पर मानिकपुर व् मारकुंडी थाना पुलिस की कई टीमें पाठा क्षेत्र के करौंहा, लक्ष्मणपुर, अमचुर नेरुआ,निही चिरैया आदि बीहड़ के इलाकों से होते हुए रीवा सतना व् पन्ना के जंगलों में पहुंची. इस दौरान पड़ोसी जनपद सतना(मध्य प्रदेश) की पुलिस भी सर्च ऑपरेशन में शामिल रही.
नहीं मिली सफलता
इसके इतर पुलिस टीमों को सफलता नसीब नहीं हुई. डकैतों के कई संभावित ठिकानों तक खाकी ने नजरें दौड़ाई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. कई घण्टे जंगलों की खाक छानने के बाद टीमें वापस लौट गईं लेकिन कई ठिकानों को चिन्हित भी किया गया जहां दस्यु गैंग पनाह ले सकते हैं. थानाध्यक्ष मानिकपुर केपी दूबे ने बताया कि गैंग की लोकेशन मिलने पर पन्ना के जंगलों तक टीमें पहुंची थी. बीहड़ के कई संवेदनशील इलाकों को ट्रेस किया गया है.
सीमावर्ती इलाकों में अक्सर पनाह लेते हैं गैंग
यूपी एमपी के सीमावर्ती इलाकों के घने जंगलों व बीहड़ों में अक्सर दस्यु गैंग पनाह लेते रहते हैं. बेहद घने व अबूझ पहेली की तरह के ये जंगल डकैतों के लिए हमेशा से मुफीद स्थान रहे हैं. पुलिस जहां एक तरफ इन इलाकों में एक निश्चित ट्रैक पर चलती है वहीँ दस्यु गैंग क्षेत्र के चप्पे चप्पे से वाकिफ रहने के कारण किधर भी पहुंच सकते हैं. दूसरी बात अभी भी पुलिस के मुखबिर कमजोर ही साबित हो रहे हैं.