
किसकी रैकिंग में पहली बार टॉप 200 में चित्तौड़ शहर
चित्तौडग़ढ़. गली-मोहल्लों में रोज सुबह स्वच्छता का संदेश देने के लिए ऑटो टीपर में बजने वाला गीत स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने अब चित्तौडग़ढ़ शहरवासियों पर कुछ करता दिख रहा है। गीत के संदेश को आत्मसात करते हुए शहरवासियों के सामूहिक प्रयासों ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 के परिणामों में चित्तौडग़ढ़ शहर को एक से दस लाख की आबादी वाले शहरों की रैकिंग में पहली बार टॉप 200 में जगह दिलाई है। अब तक चित्तौडग़ढ़ कभी अपनी श्रेणी में पहले 300 शहरों में भी स्थान नहीं बना पा रहा था। केन्द्र सरकार की ओर से गुरूवार को स्वच्छ सर्र्वेक्षण 2020 के परिणाम घोषित किए गए। नेशनल रैकिंग में इन्दौर जहां एक बार फिर देश का सर्वाधिक स्वच्छ शहर घोषित किया गया। वहीं चित्तौडग़ढ़ एक से दस लाख की आबादी वाले शहरी निकायों के सर्वे में शामिल देश के 382 शहरों में 194 वें स्थान पर रहा है। गत वर्ष हमारी रैकिंग किसी भी स्वच्छता सर्र्वे में सबसे नीची 327वीं रही थी। राज्य के अपनी आबादी श्रेणी के 25 प्रमुख शहरों में चित्तौडग़ढ़ की रैकिंग 8वेंस्थान पर रही है। इस श्रेणी में नेशनल स्तर पर 54वीं रैकिंग के साथ राज्य में उदयपुर प्रथम रहा। स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए तय मानकों के आधार पर इस वर्ष जनवरी माह में सर्वे किया गया था। स्वच्छ सर्वेक्षण-2020 में चित्तौडग़ढ़ की 327वें से 194वीं स्थान पर लगाई छलांग ने पॉलीथिन मुक्त चित्तौैडग़ढ़ की पहल के साथ शहर में स्वच्छता व ठोस कचरा निष्पादन के लिए सामूहिक प्रयासों के परिणाम उजागर किए है।
बिगडऩे के बाद इस बार सुधरी हमारी रैकिंग
स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 में चित्तौडग़ढ़ की स्थिति 327वीं रैंक के साथ पिछले दो सर्वेक्षण के मुकाबले अधिक खराब हुई थी। स्वच्छ सर्वेक्षण 2018में चित्तौडग़ढ़ देश में 320 वें एवं वर्ष 2017 में 301वें स्थान पर रहा था। हर बार सर्वे परिणाम आने के बाद नगर परिषद प्रशासन ने पहले से बेहतर परिणाम पाने के संकल्प अवश्य जताए लेकिन उसे धरातल पर साकार नहीं कर पाए थे। वर्ष 2020 में शहरवासियों की जागरूकता व सामूहिक प्रयासों ने रैकिंग सुधारी व चित्तौडग़ढ़ 194वीं रैकिंग पर आ गया।
आबादी के आधार पर किया निकायों को वर्गीकृत
स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में देश के 4 हजार 242 नगरीय निकाय शामिल किए गए थे। इन निकायों को आबादी के आधार पर अलग-अलग वर्गीकृत कर उसी आधार पर वर्गवार नेशनल व स्टेट रैकिंग जारी की गई। इन वर्र्गो में दस लाख या अधिक आबादी, एक से दस लाख, पचास हजार से एक लाख,25 हजार से50 हजार एवं 25 हजार से कम आबादी वाले निकाय वर्ग थे। चित्तौडग़ढ़ नगर परिषद एक लाख से दस लाख की आबादी वर्ग में शामिल थी तो निम्बाहेड़ा नगरपालिका पचास हजार से एक लाख आबादी वाली श्रेणी में थी। रावतभाटा नगरपालिका 25 से 50 हजार वाले वर्ग में तो बेगूं, बड़ीसादड़ी व कपासन 25 हजार से कम आबादी वाले निकायों की श्रेणी में शामिल थे।
क्या रहे स्वच्छ सर्वेक्षण रैकिंग के मानक
स्वच्छता सर्वेक्षण में विभिन्न मानकों के आधार पर सर्वे किया गया। इनमें सीधा अवलोकन, सिटीजन फीडबैक, सर्विस लेवल प्र्रोग्रेस आदि मानक थे। लोगों को स्वच्छता से जुड़ी कितनी बेहतर सेवाएं दी जा रही है, लोग स्वच्छता पर कामकाज के बारे में क्या सोचते आदि को भी सर्वे में शामिल किया गया। ये सर्वे पहली बार पूर्णतया डिजीटाइज्ड व पेपरलैस हुआ था।
किस लिए सुधर पाई रैकिंग
स्वच्छ सर्र्वेक्षण-2020 में भी चित्तौड़ की स्थिति सुधर पाने के पीछे मुख्य कारण स्वच्छता के धरातल पर कुछ ठोस काम होना है। इस कार्य में भी सरकारी तंत्र से अधिक स्वयंसेवी व सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही। पॉलीथिन मुक्ति के लिए गत वर्ष कई संगठनों ने कपड़े के थैैले वितरित करने के अभियान चलाए। लोगों को आसपास स्वच्छ माहौल रखने व कचरा सड़क की बजाय ऑटोटीपर में ही डालने के लिए प्रेरित किया गया। नगर परिषद में भी लोगों को ऑनलाइन सेवाओं से जुडऩे के लिए प्रेरित किया गया।
हम इससे संतुष्ट नहीं हो जाएंगे
स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले इस बार हमारे बोर्ड को कार्य करने के लिए अधिक समय नहीं मिल पाया। इसके बावजूद चित्तौडग़ढ़ पहली बार टॉप 200 रैकिंग है हालांकि हम इससे संतुष्ट नहीं हो जाएंगे। अब हमारा लक्ष्य अगले सर्वे में सभी के प्रयासों से शहर की नेशनल रैकिंग दहाई की संख्या व राज्य में टॉप तीन में लाना होगा। रैकिंग में सुधार का सबसे बड़ा श्रेय आमजन के साथ दिनरात शहर को स्वच्छ बनाने में लगे सफाईकर्मियों को देता हूं।
संदीप शर्मा, सभापति, नगर परिषद, चित्तौडग़ढ़
Published on:
20 Aug 2020 11:58 pm
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