
खेतों में अफीम चट कर रहे नशेड़ी तोते,सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Opium Crop Loss: मेवाड़ क्षेत्र में खेतों में खड़ी अफीम की फसल नशेड़ी तोतों के निशाने पर है। रोजाना सैंकड़ों की संख्या में तोते खेतों में खड़ी अफीम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। दरअसल क्षेत्र के अधिकांश तोतों को नशे की लत पड़ चुकी है और इसी के चलते किसानों के लाख उपाय करने के बावजूद फसलों पर तोते मंडराते हैं। यानि तोते रोजाना करीब 2 लाख रुपए कीमत वाली फसल का नशा कर रहे हैं।
किसानों की मानें तो क्षेत्र में तोतों को अफीम के नशे की लत लग चुकी है। तोते खेतों में पहुंचकर डोडों को नुकसान पहुंचाते हैं जिससे फसल की गुणवत्ता पर बड़ा दुष्प्रभाव पड़ने पर किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
अफीम के खेत में तोते पूरी टोली के साथ आकर अफीम के पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। अफीम के डोडे पर चोंच मारकर ये रस पी जाते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
किसानों को इस बार अनुकूल मौसम के चलते अच्छी पैदावार की उम्मीद है लेकिन अफीम के डोडे से नशा कर रहे तोतों से फसल पर खतरा भी मंडरा रहा है। इस साल अफीम की फसल के लिए मौसम अनुकूल है और ओलावृष्टि और पाले की मार बचने के कारण बंपर पैदावार की भी उम्मीद है। तोतों से फसलों को बचाने के लिए किसानों ने अब बर्ड नेट और खेतों में लाउड स्पीकर तक भी लगाए हैं।
राजस्थान में भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा,प्रतापगढ़,उदयपुर और बारां जिले में अफीम की खेती होती है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ अफीम की खेती के लिए अधिसूचित (Notified) प्रमुख राज्य है। इसकी खेती नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियंत्रण और पट्टा (License) के तहत ही की जाती है। चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ राजस्थान में अफीम उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में अफीम का सरकारी रेट 2500 रुपए प्रति किलोग्राम है, वहीं बाजार में अवैध रूप से 2 लाख रुपए किलोग्राम या उससे भी अधिक दामों पर बिक्री होने का अनुमान होता है।
राजस्थान में भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा,प्रतापगढ़,उदयपुर और बारां जिले में अफीम की खेती होती है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ अफीम की खेती के लिए अधिसूचित (Notified) प्रमुख राज्य है। इसकी खेती नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियंत्रण और पट्टा (License) के तहत ही की जाती है। चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ राजस्थान में अफीम उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं।
सरकारी स्तर पर काश्तकारों से बिना चीरा लगा अफीम डोडा (सीपीएस) उपज की खरीद का काम झालावाड़ में 8 अप्रैल चित्तौड़गढ़ द्वितीय खण्ड में 11 अप्रैल से, प्रतापगढ़ प्रथम खण्ड में 12 अप्रैल से, प्रतापगढ़ द्वितीय खण्ड में 13 अप्रैल से, चित्तौड़गढ़ प्रथम एवं तृतीय खण्ड में 15 अप्रैल से, भीलवाडा में 16 अप्रैल से शुरू होगा।
कोटा प्रभाग के अन्तर्गत, रामगंज मण्डी तहसील के काश्तकारों से बिना चीरा लगा अफीम डोडा यानि सीपीएस का काम 6 अप्रैल से, रामगंजमण्डी केन्द्र पर तथा अन्य सभी काश्तकारों से 17 अप्रैल से छीपाबडोद केन्द्र पर शुरू किया जाएगा।
Updated on:
04 Feb 2026 11:35 am
Published on:
04 Feb 2026 11:35 am
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