
प्रभारी बोलीं, सरकार के आदेश है, डेंगू मलेरिया के आंकड़े लीक नहीं करें
चित्तौडग़ढ़
चित्तौडग़ढ़ शहर और जिले के ग्रामीण अंचल में डेंगू और मलेरिया को लेकर हालात चिन्ताजनक बन गए हैं। सांवलिया जी अस्पताल में तो डेंगू और मलेरिया के आंकड़े देने से कतरा रहे हैं। अस्पताल के मलेरिया, डेंगू जांच शाखा की प्रभारी डॉ. नेहा अग्रवाल का कहना है कि डेंगू और मलेरिया के आंकड़े लीक नहीं करने के लिए राज्य सरकार ने आदेश जारी कर रखा है।
डेंगू और मलेरिया फैलाने के लिए जिम्मेदार एडीस एजिप्टाई और एनोफ्लिज मच्छर के लार्वा शहर और जिले के ग्रामीण अंचल में दस्तक दे रहे है। शहर की कच्ची बस्तियों में एडीस एजिप्टाई और एनोफ्लिज मच्छर के लार्वा पाए जा रहे हैं। कई भूखण्डों और गड्ढों में भरे पानी की निकासी अब तक नहीं हो पाई है।
एक तरफ शहर और जिले में मलेरिया और डेंगू रोगियों की संख्या बढती जा रही है, वहीं जिले के सबसे बड़े सांवलियाजी अस्पताल में डेंगू और मलेरिया जैसी जांच शाखा की प्रभारी डॉ. नेहा अग्रवाल यह कहकर राज्य सरकार को बदनाम कर रही है कि मलेरिया और डेंगू रोगियों के आंकड़ों को लीक नहीं करने के लिए राज्य सरकार ने आदेश जारी कर रखे हैं। जबकि चिकित्सा विभाग के जयपुर मुख्यालय पर बैठने वाले उच्च अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।
जिले में एक डेढ हजार से ज्यादा डेंगू-मलेरिया के रोगी
जून से लेकर अगस्त तक जिले में डेढ हजार पुरूष व महिलाएं डेंगू व मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। अकेले सांवलिया जी अस्पताल में डेंगू के जून में ६५, जुलाई में ८५ और अगस्त में १५७ रोगी भर्ती हो चुके हैं। अस्पताल के लैब में ही इनके खून की जांच की गई थी। जबकि अस्पताल के इसी लैब में तीन माह में ८०९ मरीजों के खून की जांच में मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है। इनमें जून में १८८, जुलाई में २१९ व अगस्त में ४०२ रोगियों में मलेरिया की पुष्टि हुई। इसके बावजूद जांच शाखा की प्रभारी डॉ. अग्रवाल आंकड़े छिपाने के लिए राज्य सरकार के आदेश की आड़ ले रही है, जो कभी जारी ही नहीं हुए। यह आंकड़ा सिर्फ सांवलिया जी अस्पताल का है। जिले के ग्रामीण अंचल की बात करें तो डेंगू और मलेरिया का आंकड़ा डेढ हजार से भी पार है। कई रोगियों ने अपना इलाज निजी चिकित्सालयों में और उदयपुर व अहमदाबाद में करवा रहे है।
डंक दिखा रहा डेंगू, हड़बड़ा रहा सेहत का महकमा
जिले भर में डेंगू और मलेरिया के रोगी बढते जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामकेश गुर्जर कई बार इस संबंध में निर्देश भी जारी कर चुके हैं, लेकिन मेडिकल टीमें मजरों और ढाणियों तक नहीं पहुंच पा रही है। हालत यह है कि डेंगू और मलेरिया के रोगियों को राज्य सरकार की नि:शुल्क दवा योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। डेंगू और मलेरिया को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में अन्दरखाने हड़कंप मचा हुआ है। आंकड़े विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं।
आंकड़े छिपाने से कम नहीं होने वाले मरीज
डेंगू और मलेरिया पर नियंत्रण के प्रयास करने के बजाय चिकित्सा विभाग आंकड़ों पर पर्दा डालकर सबकुछ सामान्य होने का राग अलाप रहा है, लेकिन सच्चाई मलेरिया और डेंगू की भयावह स्थिति को बयां कर रही है।
दिन में डंक मारता एडीस
डेंगू बुखार वेक्टर जनित वायरल रोग है, जो एडीस एजिप्टाई मच्छर के माध्यम से फैलता है। विशेष बात यह है कि यह मच्छर दिन के समय ही डंक मारता है और इसके पांच-छह दिन में व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है।
बचाव ही उपचार है
सीएमएचओ के अनुसार डेंगू के रोगी को आराम की जरूरत होती है। तेज बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से उसे पेरासिटामोल की गोली दी जा सकती है। रोगी को स्टेरॉयड, एस्प्रीन या आईबुप्रोफेन नहीं देनी चाहिए। उन्होंने रोगी को ओआरएस का घोल और हल्का भोजन देने की सलाह दी जाती है।
डेंगू के है तीन रूप
डेंगू मुख्य रूप से तीन तरह का होता है। साधारण डेंगू में तेज बुखार, कंपकंपी, सिर दर्द, कमजोरी, पेट व निचले हिस्से में दर्द, जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, शरीर लाल पडऩा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। रक्त स्त्राव वाले डेंगू में शरीर पर गहरे नीले-काले धब्बे बन जाते हैं। इसमें पेट के ऊपरी हिस्से व लीवर में दर्द होता है। चमड़ी के नीच खून का फटना, नाक व मसूड़ों से खून निकलने, खून की उल्टियां व काले रंग के दस्त की शिकायत होती है। डेंगू शॉक सिन्ड्रोम में नाड़ी कमजोर पडऩे के साथ ही उसकी चाल तेज हो जाती है। रक्तचाप कम होने के साथ ही बेचैनी बढ़ जाती है। इसमें मरीज बेहोश भी हो सकता है।
Published on:
26 Sept 2022 10:35 pm
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