चित्तौड़गढ़

सीताफल की खेती से बढ़ेगी पंचायत की आय

चित्तौडग़ढ़. ग्राम पंचायत आंवलहेड़ा स्थित पंचफल उद्यान पर सीताफल की बालानगरी किस्म के 1300 पौधे लगाने का कार्य किया जा रहा है। अगले तीन वर्षो में इन पौधों से हरियाली के साथ-साथ इन पर फल लगने से यह पहल ग्राम पंचायत के लिये स्थायी आय का स्त्रोत भी बन जाएगा।

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सीताफल की खेती से बढ़ेगी पंचायत की आय

चित्तौडग़ढ़. ग्राम पंचायत आंवलहेड़ा स्थित पंचफल उद्यान पर सीताफल की बालानगरी किस्म के 1300 पौधे लगाने का कार्य किया जा रहा है। अगले तीन वर्षो में इन पौधों से हरियाली के साथ-साथ इन पर फल लगने से यह पहल ग्राम पंचायत के लिये स्थायी आय का स्त्रोत भी बन जाएगा।
आंवलहेड़ा की सरपंच लीलादेवी कुमावत ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क और ग्राम पंचायत द्वारा पंचफल को विकासित करने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा गढ्ढे कराने एवं जिं़क की ओर से सीताफल के पौधे उपलब्ध कराये गये है। फलदार पौध लगाने से आस पास के क्षेत्र में हरियाली के साथ जल्द ही भविष्य में पंचायत को स्थायी आय भी मिलने लगेगी।
जिं़क की ओर से आंवलहेडा में उद्यानिकी विकास कार्यक्रम एवं पेयजल कूप, पम्प एवं पाइपलाइन बिछा कर गा्रमीण जनता के लिए पेयजल की आपूर्ति आवश्यकता के साथ ही चरागाह भूमि को पंचफल उद्यान में विकसित किया गया। ग्राम पंचायत के सहयोग से चरागाह उद्यानिकी विकास कार्यक्रम के तहत् 7.28 हेक्टेर क्षेत्र में पूर्व में फलदार पौधे मय ड्रीप ईरिगेशन एवं वानिकी पौधे लगाकर विकसित करने का कार्य किया गया है। इन पौधों के लिए 33 हजार भराव लीटर क्षमता के जल संग्रहण केन्द्र का निर्माण एवं वायर फेन्सिग भी जिंक की ओरसे किया गया है। पौधे लगाने के लिए गांव प्रतिनिधि रतन कुमावत, नारायण कुमावत, मुकेश वैष्णव, शंकर कुमावत आदि योगदान रहा।

अगले तीन वर्षो में मिलने लगेगी पैदावार
बालानगरी सीताफल की किस्म जिले की जलवायु के अनुकूल है, पंचफल में उपलब्ध मिट्टी और पानी की मात्रा से यह फसल संभव है। बरसात के मौसम में सीताफल की फसल लगायी जाती है। पंचफल पर पहाड़ी ढलान पर पानी को एकत्र करने की व्यवस्था की गई है। संभवतया अगले तीन वर्षो में सीताफल की पैदावार मिलने लगेगी।

Published on:
29 Jul 2021 09:48 pm
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