इतना ही नहीं स्वयं आज दूसरों को भी रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे है। परंपरागत खेती छोड़ खेती में ये नवाचार करना किसान के लिए आसान नहीं था। प्रजापत के सामने सबसे बड़ी पहली चुनौती चूरू का मौसम था। यहां सर्दियों में पारा माईनस में चला जाता है तो गर्मियों में तापमान अर्द्धशतक लगा देता है। करीब तीन महीने पहले खेती में नवाचार करने वाले ओकारमल बताते है कि वह आज प्रतिदिन 5 से 7 हजार रुपए की मंडी में सब्जी बेच रहे है। उन्होंने करीब तीन महीने पहले अपने खेत मे डेढ़ बीघा जमीन पर ककड़ी, टिंडा, टमाटर, घीया, तुरई, खरबूजा लगाए थे, और करीब 60 दिनों बाद वह सब्जी का उत्पादन शुरू हो गया।