पंजाब के सरदूलगढ कस्बे में लोहे की चद्दर से बने पानी गर्म करने के हमाम (जुगाड़ या स्वदेशी तकनीक से बनाया गया घरेलू गीजर)। सोमवार को टैम्पो में सैंकड़ों हमाम भरकर साहवा आए।
चूरू. सर्दी की आहट शुरू होते ही पानी गरम करने के लिए जहां देशी-विदेशी इलेक्ट्रोनिक कम्पनियों के गीजर एवं हीटर रॉड आदि बाजार में नजर आने लगे हैं। वहीं इन महंगे इलैक्ट्रानिक सामान से निजात दिलाने वाले स्वदेशी तकनीक से बने हमाम बेचने वाले भी बाजार में दिखाई देने लगे हैं। गीजर, हीटर रॉड का खर्चा नहीं उठा पाने वाले, बिजली की सुविधा से वंचित या फिर कुछ अनावश्यक खर्चे से बचने वाले लोग अपने खेत खलियानों और गोबर के उपलों आदि के ईंधन से काम चलाने वाले लोगों की पहली पसंद हैं। पंजाब के सरदूलगढ कस्बे में लोहे की चद्दर से बने पानी गर्म करने के हमाम (जुगाड़ या स्वदेशी तकनीक से बनाया गया घरेलू गीजर)। सोमवार को टैम्पो में सैंकड़ों हमाम भरकर साहवा आए।
सुखजीत सिंह ने बताया कि हमारे वहां लोहे का काम करने वाले अनेक कारीगर सीजन के अनुसार अपने लघु उद्योगों में लोहे का काम करते हैं, उसी क्रम में सर्दी का सीजन शुरू होने पर कई कारीगर अनुमानित 30 व 40 लीटर पानी की क्षमता के ये हमाम बनाते हैं, जिसमें लगे लोहे के वजन के हिसाब से निर्धारित थोक व खुदरा कीमतों पर वहां से खरीद कर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में घूम-घूम कर बेचते रहते हैं. उन्होंने बताया कि इन दिनों इनकी सबसे ज्यादा मांग गांवों, ढाणियों, सड़क किनारे के होटल-मोटल, झुग्गी- झौपडिय़ों में है जहां पर इन्हें 4 सौ से लेकर 5 सौ रुपए प्रति नग के हिसाब से बेचते हैं।
खर्चा कम, काम ज्यादा
सेवानिवृत तहसीलदार मनोहर लाल स्वामी, समाजसेवी बृह्मानंद दुदानी, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. श्रवण कुमार स्वामी, ऑल इन्डिया पारीक महासभा प्रवक्ता बिद्याधर पारीक, परचून व्यापारी नवल दुदानी, बर्तन विक्रेता मोहन लाल कस्वां, शिक्षाविद डॉ. रणधीर सिंह ढाका, इलैक्ट्रोनिक सामान विक्रेता अमीलाल सहारण, किसान व पशु पालक उदाराम मेघवाल आदि लोगों ने इन घरेलू गीजर पर चर्चा की। बताया कि इसमें लकड़ी, जलाउ चारा, गोबर की थेपड़ी, लकड़ी के बुरादे आदि से जब चाहे तब जरूरत अनुसार कम खर्चें में पानी गर्म तो किया जा सकता ही है। वहीं इसे बनाने और बेचने वाले अनेक लोगों को रोजगार मिलने के अलावा इससे स्वदेशी के उपयोग व प्रचार को बल, बिजली, गैस आदि की निर्भरता से छुटकारा, परम्परागत ईंधन के उपयोग के प्रति रूझान आदि बहुत से लाभ हो रहे हैं।