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हाईटेक स्मैक तस्करी की गिरफ्त में राजस्थान का यह शहर, नशे की जद में फंसता युवा भविष्य

सूत्रों के अनुसार नशे का यह काला कारोबार अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहा। तस्करों ने मोबाइल फोन, कोडवर्ड, सीमित समय के सिम कार्ड और डिजिटल नेटवर्क का सहारा लेकर इसे पूरी तरह हाईटेक बना लिया है।

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Representational image - IANS

रामकुमार सिहाग

साहवा. चूरू जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित साहवा कस्बा इन दिनों एक गंभीर सामाजिक संकट से जूझ रहा है। पंजाब, हरियाणा, गंगानगर और हनुमानगढ़ से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र में नशीले पदार्थों, विशेषकर स्मैक (चिट्टा/हेरोइन) की तस्करी ने पैर पसारे हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि साहवा को जिले में नशे के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाने लगा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस घातक नशे की चपेट में बड़ी संख्या में युवा वर्ग आ रहा है, जिससे उनका भविष्य दांव पर लग गया है।

चोरी छुपे नशीले पदार्थों की आपूर्ति

सूत्रों के अनुसार नशे का यह काला कारोबार अब पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहा। तस्करों ने मोबाइल फोन, कोडवर्ड, सीमित समय के सिम कार्ड और डिजिटल नेटवर्क का सहारा लेकर इसे पूरी तरह हाईटेक बना लिया है। बसों, ट्रेनों, कैब टैक्सियों और निजी वाहनों के जरिए स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों की आपूर्ति की जा रही है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से आने वाली खेप पहले बड़े सौदागरों तक पहुंचती है, फिर उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर नशेड़ियों तक पहुंचाई जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि साहवा में स्मैक की उपलब्धता इतनी बढ़ गई है कि यह आसानी से मिल जाती है।

छोटे स्तर पर जुडे तस्करों के खिलाफ कार्रवाई

साहवा में पुलिस थाना खुलने के बाद एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत कई मामले दर्ज हुए हैं और कुछ आरोपी जेल भी भेजे गए हैं, लेकिन नागरिकों का आरोप है कि कार्रवाई अधिकतर छोटे स्तर के तस्करों तक सीमित रह जाती है, जबकि असली सरगना तक पुलिस पहुंच ही नहीं पा रही हैं। जिस स्मैक ने पंजाब की युवा पीढ़ी को तबाह किया, वही जहर अब राजस्थान (Rajasthan) के गांवों तक फैल चुका है। अफीम और पोस्त जैसे पारंपरिक नशों के बाद अब स्मैक, नशीली गोलियां और इंजेक्शन तक युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। नशे की बड़ती प्रवृति से आपराधिक घटनाएं हो रही हैं।

टूट रहे हैं परिवार

नशे के कारण परिवार टूट रहे हैं। नशा न मिलने पर असामान्य व्यवहार, घर में कलह और आर्थिक तंगी आम हो गई है। नशा मुक्ति केंद्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है, जहां स्मैक की लत छुड़ाना बेहद कठिन बताया जा रहा है। गत वर्ष गंगानगर में ड्रोन से आई स्मैक की खेप में साहवा के युवक की गिरफ्तारी ने यह भी साबित किया कि कस्बे के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

चिंतातुर हुआ प्रशासन और समाज

अभी हाल ही में यहां हुए कार्यक्रम में जिला कलक्टर अभिषेक सुराणा ने नशे के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने अभिभावकों और समाजसेवी संगठनों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। विशेषज्ञों और समाजसेवियों का मानना है कि यह समस्या केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की है। जब तक पुलिस, प्रशासन, समाज और परिवार मिलकर ठोस प्रयास नहीं करेंगे, तब तक साहवा को नशे के इस अंधकार से बाहर निकालना मुश्किल होगा।

चला रहे है अभियान

डीएसपी तारानगर रोहित सांखला ने बताया कि पुलिस मुख्यालय जयपुर के निर्देशानुसार नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा नशा संबंधी सूचना पुलिस से सांझा करने की अपेक्षा की। थानाधिकारी शंकरलाल भारी के अनुसार साहवा थाना क्षेत्र में स्मैक सहित सभी प्रकार के नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन से जुड़े लोगों को चिन्हित कर समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है तथा रोकथाम के लिए नियमित प्रयास किए जा रहे हैं।