DBH: दरअसल, साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर डीबीएच हॉस्पिटल में अजीब ही स्थिति है।
चूरू. मेडिकल कॉलेज का अहम अंग बन चुके डीबीएच अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ लगी रहती है। करीब डेढ़ से दो हजार की ओपीडी और डेढ़ सौ से भी अधिक की आईपीडी की संख्या इस अस्पताल की साख का अंदाजा लगाने के लिए काफी है। बावजूद इसके किसी भी अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार के अहम अंग साफ-सफाई को लेकर बरती जाने वाली उदासीनता समझ से परे नजर आती है। अस्पताल प्रशासन के अहम अंग नर्सिंग कर्मी अक्सर इस मामले पर मरीजों के परिजनों का निशाना बनते हैं, तब भी अस्पताल प्रशासन इस गंभीर होती जाती समस्या का कोई स्थाई इलाज खोज पाने में असमर्थ नजर आ रहा है। हाल ही में चादरों की गंदगी को लेकर सार्वजनिक रूप से हुए एक बवाल के बाद नर्सेज एसोसिएशन को बाकायदा एक पत्र लिख कर अस्पताल प्रशासन के उच्च अधिकारियों से इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई करने की मांग करनी पड़ी।
अजीब स्थिति
दरअसल, साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर डीबीएच हॉस्पिटल में अजीब ही स्थिति है। इसकी साफ-सफाई और चादरों आदि का जिम्मा अस्पताल प्रशासन ने वार्ड प्रभारी के रूप में मौजूद नर्सिंग कर्मी को बना रखा है, लेकिन उस नर्सिंग कर्मी को न तो यह पता होता है कि उसके वार्ड में कितने सफाई कर्मी तैनात हैं, किसकी कब से कब ड्यूटी है या किससे चादरों की साफ-सफाई की बात करें। मरीज के परिजन उससे जब इस संबंध में शिकायत करते हैं, तो उसको जवाब नहीं सूझता। ऐसे हालात में इसी हफ्ते नर्सेज एसोसिएशन ने बाकायदा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य, पीएमओ डीबीएच आदि को पत्र भेज कर एक मांग पत्र भी सौंपा है, जिसमें उसने बिंदुवार साफ-सफाई की व्यवस्थाओं के लिए आग्रह किया है।
क्या है ज्ञापन में
एसोसिएशन ने ज्ञापन में लिखा है कि उसके नर्सिंग कर्मी को इंचार्ज होने के नाते यह पता होना चाहिए कि साफ-सफाई की किन शर्तों पर टेंडर मंजूर हुआ था। कितने आदमी कहां-कहां और कौन कौन सी ड्यूटी करेंगे, यह भी उस नर्सिंग कर्मी को पता होना चाहिए। सफाई की व्यवस्था के लिए किससे सीधे संपंर्क किया जाए, यह भी स्पष्ट किया जाए और कचरे के निस्तारण की क्या व्यवस्था है, यह भी उन्हें अवगत कराया जाए, ताकि वे बार-बार प्रबंधन से शिकायत करने के बजाय संबंधित व्यक्ति या एजेंसी से सीधे संपर्क कर सकें, क्योंकि उन्हें मरीज और उनके परिजनों का सीधा आक्रोश झेलना पड़ता है। वार्डों में इमरजेंसी ड्यूटी खासतौर से रात्रि की पाली में सफाई कर्मचारी बढ़ाने सहित कई ऐसी व्यवस्थागत दिक्कतों के बारे में भी ज्ञापन में जिक्र किया गया है, जिससे नर्सिंग कर्मियों को दो-चार होना पड़ता है।
वार्ड ब्वॉय की कमी की ओर दिलाया ध्यान
नर्सेज एसोसिएशन ने ज्ञापन में अस्पताल में मौजूद वार्ड ब्वॉय की अत्यंत कम संख्या की ओर भी ध्यान दिलाया है। गौरतलब है कि जानकारी के मुताबिक डीबीएच अस्पताल में करीब डेढ़ दर्जन ही वॉर्ड बॉय तैनात हैं। इन वार्ड बॉय का साफ-सफाई में अहम योगदान होता है, क्योंकि मरीज के कमर से ऊपर तक के हिस्से की सफाई और बेड की चादर आदि बदलने का काम इन वार्ड बॉय का ही होता है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीजों के बढ़ते दबाब के बीच यहां कम से कम 100 वार्ड बॉय की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन फिलहाल करीब डेढ़ दर्जन से ही काम चलाना पड़ रहा है।
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