
चूरू. शहर में गणगौर पूजन करती मातृशक्ति।
Gangaur Puja 2024: प्रकृति आराधना और शक्ति की साधना के साथ शुरू हुए गणगौर पूजन के साथ ही गाए जानेवाले गीतों से यहां की सुबह जहां सुरमई हो रही है तो प्रभातकालीन बेला में गौरी पूजन के लिए पीहर आई नव विवाहिताएं गौरा के गीतों से मरुधरा को रिझा रही है।
गौर ऐ गणगौर मात खोल एक कींवाड़ी
सुबह घरों में जब गणगौर पूजन का यह गीत गौर ऐ गणगौर माता खोल ऐ कींवाड़ी गूंजता है तो यहां की सुबह चहक उठती हैं। पंछियों की चहचाहट और कन्याओं के कण्ठों से गूंजते गीतों से मरु भूमि भी झूम रही हैं। बसंती मौसम में पेड़ पौधों से फूटती नव कुंपले और मिंझर की सुगंध से महक रही धरा चहक रही हैं।
गणों का पूजन
होली पर धुलण्डी से शुरू हुए एक पखवाड़े के गणगौर पूजन के प्रथम चरण में गौरा-ईशर के प्रतिकात्मक गण जो होलिका की राख से बनाए हुए हैं की पूजा की जा रही हैं। समूह में कन्याएं गणगौर का पूजन करते हुए लोक संस्कृति से रचे बसे गीतों का गान करती है तो गौरा का ध्यान कर अमर सुहाग-भाग की कामना करती हैं।
नव विक्रम संवत में होगा विसर्जन
बीत रहे विक्रम संवत 2080 के आखरी चैत्र पखवाड़े में शुरू होनेवाला गणगौर पूजन नव विक्रम संवत 2081 चैत्र प्रतिपदा से प्रवेश करेगा और वसंती चैत्र नवरात्र की तृतीया के दिन गणगौर पर्व पर हर घर में गौनी का पूजन होगा। शाम को मेला भरेगा, गणगौर की सवारी निकलेगी तथा घरों में पूजी जाने वाली गणगौर का कुएं में विसर्जन कर उन्हें विदा किया जाएगा।
शीतला अष्टमी पर पूजन का शुरू होगा दूसरा चरण
चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होनेवाले गणगौर पूजन के प्रथम चरण के पहले सप्ताह में पूजे जाने वाले पिण्ड शीतला अष्टमी पर साकार रूप लेंगे। शीतला मेले पर मिट्टी लाकर पूजन करनेवाली मातृ शक्ति गणगौर बनाएंगी। गौरा, ईशर, कानाजी और गणगौर की सखियों की प्रतिमा बनाकर उनका शृंगार करेंगी और फिर एक सप्ताह तक उनकी पूजा अर्चना की जाएगी।
लोक संस्कृति और गूंजते हैँ प्रकृति की आराधना में गीत
लोक पूजन गणगौर के एक पखवाड़े तक यहां लोक संस्कृति के साथ प्रकृति में आराधना में गीत गूंजते हैं। मरुधरा के रोहिड़ा के खिलते कसुमलरंगी फूल और हरितमा की ओर लौटती प्रकृति के जब महिलाएं खीपोळी म्हारी खींपा छाई राजा... जैसे गीत गाती है तो वे म्हारा हरिया ज्वाहरा..गीत गाती है तो सुबह और शाम सुहानी हो जाती हैं। बधावा गीत, गौरा की वंदना के गीत और धरती मां की पूजा में गाए जानेवाले गीत मातृ शक्ति की आराधना में साधना की अभिव्यक्ति को प्रतिबिम्बित करती हैं।
Published on:
29 Mar 2024 02:36 pm
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