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संतों के मिलन से माहौल धर्ममय, भावुक हुए श्रावक

चातुर्मास के लिए शहर में विराजित आचार्य और मुनि वृंदों के मिलन से माहौल धर्ममय व भावुक हो गया। आर जी स्ट्रीट के सुपाश्र्वनाथ आराधना भवन में विराजित मुनि हितेशचंद्र विजय के सान्निध्य व निश्रा में राजस्थान जैन सकल श्रीसंघ बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित आचार्य रत्नसेन सूरीश्वर से क्षमापना के लिए मिलने पहुंचा।

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संतों के मिलन से माहौल धर्ममय, भावुक हुए श्रावक

संतों के मिलन से माहौल धर्ममय, भावुक हुए श्रावक

कोयम्बत्तूर. चातुर्मास के लिए शहर में विराजित आचार्य और मुनि वृंदों के मिलन से माहौल धर्ममय व भावुक हो गया। Coimbatore आर जी स्ट्रीट के सुपाश्र्वनाथ आराधना भवन में विराजित मुनि हितेशचंद्र विजय के सान्निध्य व निश्रा में राजस्थान जैन सकल श्रीसंघ बहुफणा पाश्र्वनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित आचार्य रत्नसेन सूरीश्वर से क्षमापना के लिए मिलने पहुंचा। दो संतों के मिलन के वक्त माहौल धर्ममय व भावुक हो गया। इस मौके पर आगामी ११ सितम्बर को होने वाले कार्यक्रम के लिए भी आग्रह किया गया।
क्षमारूपी आभूषण को करें धारण
क्षमा वीरों का वह आभूषण है जिसे कोई लूट नहीं सकता। क्षमा शब्द ही आत्मबोध करता है। भगवान महावीर के क्षमा बोध से चंडकौशिक जैसे विषैले सर्प का उद्धार हो गया और वह संसार सागर से पार हो गया। यह बात मुनि हितेशचंद्र विजय ने क्षमापना के मौके पर सुपाश्र्वनाथ आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमें भी भौतिक आभूषण का त्याग कर क्षमारूपी आभूषण को धारण करना चाहिए। तभी आत्म कल्याण होगा। उन्होंने कहा कि वैमनस्यता को त्याग कर परस्पर स्नेह का प्रयत्न रकना चाहिए। बैर दूरियां बढ़ाता है वहीं क्षमा अपनों को अपनों के करीब लाती है। क्षमा बैर का समाधान है। महावीर की करुणा है। मानव मात्र से क्षमा के भावों को पूर्व के द्वेष का प्रायश्चित मानकर क्षमा याचना करनी चाहिए। तभी हमारी ओर से किया गया सांवत्सरिक प्रतिक्रमण सार्थक होगा।