
आत्म भाव की स्थिरता से जीवन में शांति
कोयम्बत्तूर. जैन मुनि हितेशचंद्र विजय ने कहा है कि आत्म भाव की स्थिरता के बिना हमें कभी शांति नहीं मिल सकती। मानव में राग -द्वेष भरा हुआ है। परमात्मा व गुरू ही हमें स्थिरता व शांति दिला सकते हैं।
मुनि शुक्रवार को यहां Rajasthan jain shwetamber murti pujak sangh राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ की ओर से Coimbatore सुपाश्र्वनाथ आराधना भवन में आयोजित चातुर्मास में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म तत्व की जो स्थिरता है ,वही हमारे भाव की स्थिरता है। परमात्मा हमारा शुद्ध आत्म द्रव्य है और गुरू शुद्धात्मक द्रव्य साधक हैं। मुनि ने कहा कि शरीर में साढ़े तीन करोड़ रोंगटे हैं। जिस आत्म प्रदेश में असंख्य रोग हैं इस रोग के निवारण का एक मात्र साधन परमात्मा भक्ति है। उन्होंने कहा कि आत्मा का बार -बार चिंतन करने से अनंत सुखों की प्राप्ति होती है। कर्म की निर्जरा भी होती है। बुरे व्यक्ति के प्रति हमारा बुरा व्यवहार हो तो यह व्यवहार का परिणाम है। हम निंदा में लिप्त हो जाएंगे तो निंदक बन जाएंगे जो आत्म शुद्धि में सबसे बड़ा घातक है। मुनि ने कहा हम प्रशंसा करने वाले प्रशंसक बने यही परमात्मा की वाणी है।
Published on:
20 Jul 2019 11:51 am
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