
शास्त्र श्रवण से आत्मकल्याण
कोयम्बत्तूर. शास्त्र श्रवण से आत्म कल्याण होता है। इसी प्रकार मंत्रों के श्रवण से शारीरिक रोगों का निदान होता है। साथ ही मन को स्थिरता मिलती है। जैन शास्त्रों में कई स्त्रोत हैं जिसमें यंत्र, मंत्र व तंत्र तीनों का समावेश होता है। मंत्रों के श्रवण मात्र से कई असाध्य रोगों का निदान होता है।
यह बात जैन मुनि हितेशचंद्र विजय ने कही। वे शरद पूर्णिमा के मौके पर आरजी स्ट्रीट स्थित जैन आराधना भवन में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आश्विन मास की पूर्णिमा को जाग्री पूर्णिया रास भी कहा जाता है। ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा अपनी १६ कलाओं से अपनी किरणोंं को बिखेरता है। इससे रात्रि में की जाने वाली आराधना से रोगों का निवारण होता है। सरस्वती आराधना भी इसी दिन की जाती है। बप्प भट्ट सूरी कृत सरस्वती स्त्रोत के जाप के साथ आराधना करने पर मंद बुद्धि भी तीव्र होती है।
उन्होंने महामांगलिक के दौरान शरद पूर्णिमा के विषय में कई मंत्रों पर प्रकाश डाला। साथ ही नव्वाणु भाव यात्रा के महत्व को बताया। राजस्थानी जैन संघ की ओर से लाभार्थी परिवार व तपस्वियों का बहुमान किया गया।
Published on:
14 Oct 2019 03:13 pm
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