भारतीय टीम में चयन होने पर रिंकू भावुक हो गए और उन्होंने इस बात की जानकारी अपने पिता को फोन पर दी। जैसे ही उनका भारतीय टीम में चयन हुआ उन्होंने अपने पिता को फोन लगाया और कहा, 'पापा राम-राम, मेरा नंबर आ गया।'
Rinku Singh Asia Games 2023 Indian Cricket team: चीन में आयोजित होने वाले 19वें एशियन गेम्स में इस बार क्रिकेट भी खेला जाएगा। इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया गया है। BCCI द्वारा घोषित इस 15 सदस्यीय टीम में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2023 में बेहतरीन बल्लेबाजी से दुनिया में नाम करने वाले युवा बल्लेबाज रिंकू सिंह को चयनकर्ताओं ने इस टीम में मौका दिया है।
भारतीय टीम में चयन होने पर रिंकू भावुक हो गए और उन्होंने इस बात की जानकारी अपने पिता को फोन पर दी। जैसे ही उनका भारतीय टीम में चयन हुआ उन्होंने अपने पिता को फोन लगाया और कहा, 'पापा राम-राम, मेरा नंबर आ गया।' यह सुनते ही उनके पिता चौंक गए। कुछ पल के लिए सब कुछ थम गया, फिर वे खुशी से उछल पड़े और बोले- बेटा आपने सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, और मेहनत करो।
पिता भागते हुए रिंकू की मां के पास पहुंचे और उन्हें यह खुशखबरी सुनाई। मां बीना देवी यह खबर सुनते ही रोने लगीं। अबतक इस बात की खबर आस पास के लोगों को भी लग चुकी थी। देखते ही देखते आधी रात को रिंकू के घर के बाहर लोगों का तांता लग गया और बधाई देने का सिलसिला देर तक चला। किसी ने मिठाई खिलाई तो कोई उनके मां बाप को गले लगा रहा था।
बता दें रिंकू अलीगढ़ से हैं। उनके पिता गैस वैंडर हैं। बचपन से ही रिंकू को क्रिकेट बहुत पसंद था। लेकिन घर की माली हालत ठीक न होने के चलते उनके पिता नहीं चाहते थे कि वे इन सब में अपना समय खराब करें। इसके चलते कई बार रिंकू कि पिटाई भी होती थी। लेकिन रिंकू के इरादे पक्के थे और उन्हें उनके भाइयों का साथ मिला। रिंकू आने पिता की मारजी के बिना क्रिकेट खेलते गए, एक टूर्नामेंट ऐसा भी आया जब रिंकू को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए इनाम के तौर पर मोटरसाइकिल मिली। जो उन्होंने अपने पिता को गिफ्ट दे दी।
बस फिर क्या था पिता को भी लगा कि अलीगढ़ के कारोबारियों और कोठियों में गैस सिलिंडर पहुंचाने के सालों के काम में वे जिस मोटरसाइकिल को नहीं ख़रीद सके, वो बेटे के क्रिकेट से मिल गई। लिहाजा मार पिटाई तो बंद हो गई। लेकिन परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां बनी हुईं थीं। घर खर्च चलाने के लिए रिंकू का काम करना भी जरूरी था। ऐसे में उन्होंने एक कोचिंग सेंटर में पोंछा लगाने का काम शुरू किया। वह सुबह-सुबह जाकर कोचिंग सेंटर में पोंछा लगाने लगे। लेकिन कुछ समय बाद वे परेशान हो गए और नौकरी छोड़ दी। वे पढ़ाई में भी अच्छे नहीं थे। ऐसे में उनके सामने सिर्फ क्रिकेट की एक विकल्प था।