
लखनऊ। नोएडा अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलेगा। आज अदालत ने यादव सिंह, उसकी पत्नी कुसुमलता, प्रदीप गर्ग, पंकज जैन व विनोद कुमार गोयल के खिलाफ करोड़ों के काले धन को फर्जी कंपनियों के जरिए सफेद करने के आरोप लगाया है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर परिवाद पर संज्ञान लेकर सभी को तलब किया है। ईडी के विशेष जज आरके उपाध्याय ने कहा कि अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक यादव सिंह को जेल से लाकर कोर्ट में हाजिर करने तथा अन्य आरोपियों को समन भेजने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ईडी के द्वारा दिए गए सबूतों के आधारा पर यादव सिंह और उसके साथियों पर मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया है।
गैरकानूनी तरीके से इलेक्ट्रिक केबिल का टेंडर देने का आरोप
मुल्जिम प्रदीप गर्ग और विनोद कुमार गोयल गाजियाबाद की डासना जेल में हैं। वहीं यादव सिंह सुनवाई के दौरान अदालत में व्हीलचेयर पर उपस्थित था। ईडी के वकील केपी सिंह के मुताबिक, यादव सिंह पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे का चीफ इंजीनियर रहते हुए गैरकानूनी तरीके से इलेक्ट्रिक केबिल का टेंडर देने का आरोप है। इसके चलते सरकार को 19 करोड़ 42 लाख की आर्थिक क्षति हुई। इसी मामले में 8 अक्टूबर 2015 को लखनऊ में ईडी ने भी यादव सिंह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अपनी जांच शुरू की थी। 27 फरवरी 2017 को इस मामले में मुल्जिम यादव सिंह को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया।
चला रहे थे फर्जी कंपनियां
यादव की पत्नी मैसर्स कुसुम गारमेंट्स, प्रदीप गर्ग मैसर्स एनकेजी इंस्ट्राफक्चर, पंकज जैन जेपीएस क्रॉस इंस्ट्राफक्चर प्राइवेट लिमेटिड, विनोद कुमार मैनेजिंग पार्टनर ऑफ तिरूपति इंस्ट्राफक्चर नाम की कंपनी फर्जी कंपनियां संभाल रहे थे। ईडी की विशेष अदालत में परिवाद दायर करके बताया था कि आरोपियों ने करोड़ों के काले धन को फर्जी कंपनियों के जरिए सफेद किया है। विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपियों ने 19 करोड़ 92 लाख रुपये के कालेधन को सफेद किया है।
Published on:
06 Aug 2017 09:55 am

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