
उसकी आत्मा मुझे बुला रही है, मेरे कानों में उसकी आवाज गूंजती है... लिखकर मददगार सौरभ चला गया
मुंबई। ...मेरी आंखों के सामने आज भी वो मंजर घूमता है। वो छोटा बच्चा था। उसकी इतनी जल्दी मौत नहीं होनी चाहिए थी। बेचारा मासूम मेरी आंखों के सामने एक्सीडेंट में अपनी जान गवां बैठा। वो घटना मुझे भूले नहीं भूलती है। कुछ तो है कि बाद में मेरा भी वहीं पर एक्सीडेंट हो गया। उसकी आत्मा रोज मुझे बुलाती है और उसकी बचाओ-बचाओ की आवाज मेरी कानों में हर वक्त गूंजती है। मैं चाहकर भी उसका कहा नहीं टाल सकता। इसलिए जा रहा हूं। मम्मी-पापा मुझे प्लीज माफ कर दीजिएगा... दीदी आप बहुत अच्छी हैं.. प्लीज मम्मी-पापा का ध्यान रखिएगा... महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट सौरभ नागपुरकर (19) ने आत्महत्या करने से पहले सुइसाइड नोट में कुछ ऐसी ही बात लिखी थीं।
घटना महाराष्ट्र के नागपुर की है और बेहद चौंकाने वाली है। एक 19 साल का किशोर सौरभ नागपुरकर जिसकी आंखों में सुनहरे भविष्य और बेहतरीन जिंदगी के सपने हैं। वो अच्छा करियर बनाने के लिए प्रियदर्शिनी भगवती कॉलेज में इंजीनियरिंग में एडमिशन लेता है और मेहनत से पढ़ाई करता है। पिता एनसीसी में काम करते हैं और बड़ी बहन कॉस्मेटोलॉजिस्ट है। सौरभ की एक कमी है कि वो दूसरो का दर्द नहीं देख पाता और समाज में फैली ऊंच-नीच उसे थोड़ा झकझोरती है। दिल से वह लोगों का दर्द समझता है।
सितंबर में उमरेर रोड पर वो एक दुर्घटना में एक छोटे बच्चे को दम तोड़ता देखता है। बच्चे की यह मौत उसके दिल पर गहरा सदमा छोड़ती है और उसे लगता है कि वो उसे बचाने के लिए कुछ कर नहीं पाया। अभी वो इस सदमे से बाहर निकल पाता तभी ठीक उसी जगह एक महिला का भी एक्सीडेंट हो जाता है। यह घटना सौरभ को विचलित कर देती है।
बच्चे का चेहरा उसकी आंखों के सामने घूमता है और वो बार-बार उसे बुलाता है। कुछ ही दिन गुजरते हैं कि सौरभ का भी ठीक उसी जगह एक्सीडेंट हो जाता है। अब तो सौरभ को पक्का यकीन हो जाता है कि इस जगह और बच्चे से उसका कुछ कनेक्शन है। सौरभ बार-बार बच्चे की आती आवाज और चेहरे को लेेकर संजीदा हो जाता है और अपनी बड़ी बहन का दुपट्टा लेकर अपने बेडरूम में फांसी लगाकर जिंदगी को अलविदा कह जाता है।
खुदकुशी से पहले वो अपनी दादी के नोटपैड पर मराठी में दो पन्नों को सुइसाइड नोट भी लिखता है और इसे अपनी जींस की जेब में रख लेता है। इस सुइसाइड नोट में वो कई बार लिखता है, 'बच्चे की आत्मा उसे बुला रही है... उसकी चीखें बार-बार सुनाई देती हैं और वो मंजर आंखों के सामने घूमता रहता है।'
सौरभ दिल से मासूम है और वो लोगों की मदद भी करना चाहता है। तभी तो केवल दो दिन पहले अपने दोस्तों के साथ उसने एक अनाथालय में उनका जन्मदिन मनाया और अगस्त से जुटाए गए 5000 रुपये खर्च किए। अगस्त से ही सौरभ अपने फेसबुक पेज पर दोस्तों से अपील कर रहा था कि वो अपना जन्मदिन उनके साथ मनाए जिन्हें खुशियों की उनसे ज्यादा जरूरत है। वो अक्सर अपने दोस्तों से यह कहता रहता था कि खाना बर्बाद मत करो।
रविवार को उसने 'बच्चे की आत्मा की आवाज सुनते हुए' उसके पास पहुंचने के लिए अपनी जिंदगी खत्म कर ली। मां-बाप के इकलौते लड़के की मौत से सभी को हैरानी हुई। घरवाले बुत से बन गए। पुलिस को खबर मिली तो उसने जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। सोमवार को मायो हॉस्पिटल से जब पोस्टमार्टम के बाद घर पर शव पहुंचा तो मा ऐश्वर्या बेसुध और बदहवास थी। पिता की आंखें सूखी और शून्य में देखती नजर आईं। बड़ी बहन अश्लेषा को समझ ही नहीं आ रहा था कि उसका इकलौता भाई इस दुनिया से चला गया और अब वो रक्षाबंधन में किसकी कलाई पर राखी बांधेगी, किससे अपना दर्द बांटेगी।
सौरभ अब तुम इस दुनिया से चले गए हो। शायद तुम्हें पता चल गया होगा कि उस बच्चे की आत्मा तुमसे कभी नहीं मिली। यह केवल तुम्हारा भ्रम था, जिसने तुम्हें अपनों से दूर कर दिया। तुमने अपने दर्द को मां-बाप, बहन और दोस्तों से नहीं बांटा। तुमने उन्हें नहीं बताया कि तुम्हें उस बच्चे की आत्मा अपने पास बुलाती है। तुम्हें उसकी आवाजें सुनाई देती हैं। अपनी जिंदगी खत्म करके तुमने भले ही उस बच्चे की पुकार तो सुन ली हो, लेकिन अपने मां-बाप-बहन-दोस्तों-रिश्तेदारों की परवाह नहीं की जो हर वक्त तुम्हें पुकारते थे। तुम उनसे अब इतनी दूर चले गए हो कि उनकी पुकार तुम तक नहीं पहुंच पाएगी। अच्छा होता कि तुम एक्सीडेंट में मरने वाले मासूम बच्चे की आत्मा से इसी दुनिया में कह देते कि सॉरी, मैं कुछ कर नहीं पाया। लेकिन मैं अच्छा इंजीनियर बनकर जरूर कुछ ऐसा ईजाद करूंगा जिससे भविष्य में उस जैसे बच्चे सड़क हादसों में मौत का शिकार न हों।
Updated on:
16 Oct 2018 01:28 pm
Published on:
16 Oct 2018 01:13 pm

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