करोड़ों के लोन का फर्जीवाड़ाः छह महीने में मर गए 15 कर्जदार, एक गायब

करोड़ों के लोन का फर्जीवाड़ाः छह महीने में मर गए 15 कर्जदार, एक गायब

Amit Kumar Bajpai | Publish: Sep, 04 2018 04:05:15 PM (IST) | Updated: Sep, 04 2018 04:10:13 PM (IST) क्राइम

तमिलनाडु में 60 करोड़ रुपये के लोन के फर्जीवाड़े में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बीते छह माह के भीतर संदिग्ध हालात में 15 कर्जदारों की मौत हो गई, जबकि एक गायब है।

चेन्नई। तमिलनाडु में 60 करोड़ रुपये के लोन के फर्जीवाड़े में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस फर्जीवाड़े में बीते छह माह के भीतर संदिग्ध हालात में 15 कर्जदारों की मौत हो गई, जबकि एक गायब है। इस फर्जीवाड़े का खुलासा एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र ने किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक अब तक मामले से जुड़ी हुई मौतों के मामले में अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई है। पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि मरने वाले सभी व्यक्ति विरुधुनगर और दक्षिण तमिलनाडु के करीबी गांव के थे। इन सभी ने बैंक से कर्ज लिया था। अखबार ने इनमें से तीन का नाम सुनिश्चित किया है, जो महालिंगम, पंडी और राजगोपाल हैं। पुलिस ने कहा कि राजगोपाल अपने पड़ोस की ही एक सड़क पर मृत मिला था जबकि अन्य दो घर पर ही मरे थे।

पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करते हुए केस बंद कर दिया है। यह सभी व्यक्ति लोन फर्जीवाड़े के एक आरोपी की मिल में काम करते थे। हालांकि संबंधित बैंक (प्रमुख राष्ट्रीय बैंक) का कहना है कि 169 किसानों को 25 से 40 लाख रुपये का लोन दिया गया था। जबकि पुलिस का कहना है कि सभी दैनिक मजदूर थे और उनके हस्ताक्षर दो आरोपियों ओएमएस वेलमुरुगन और उसके भतीजे आर शेनबागन ने करवाए थे। इन मजदूरों से हस्ताक्षर लेने के लिए उन्हें सरकारी पेंशन मिलने का झांसा दिया गया था। दस्तावेज पर हस्ताक्षर लेने के बाद इन मजदूरों के अस्थायी बैंक खातों में पैसे डाल दिए गए, जहां से उन्हें निकाल लिया गया।

 

Fraud

पीड़ितों को इस फर्जीवाड़े का पता तब चला जब बैंकों ने उन्हें वसूली का नोटिस भेजना शुरू कर दिया। नगामुथु नाम का एक रीयल स्टेट एजेंट जो बाद में पानी का कारोबारी बन गया था, उस दिन से ही गायब है जब उसे बैंक ने वसूली का नोटिस भेजा था। बैंक ने इससे लोन के रूप में लिए गए 96 लाख रुपये चुकाने को कहा था। नगामुथु बीते छह माह से भी ज्यादा वक्त से गायब है। इसके बाद उसकी पत्नी मागेश्वरी को अपनी दो बेटियों का नाम कॉलेज से कटवाना पड़ा क्योंकि वो फीस नहीं भर सकती थी।

जांच अधिकारियों का कहना है कि वेलमुरुगन और शेनबागन पहले भी कई लोन लेकर फर्जीवाड़े कर चुके हैं और थेनी व विरुधुनगर जिले में उन्होंने कई सौ करोड़ रुपये का घपला किया है। हालांकि बावजूद इसके वे दोनों पुलिस की गिरफ्त में आने से काफी लंबे वक्त तक बचे रहे और कानून से बचने के लिए कई हथकंडे इख्तियार किए। लेकिन अंत में वेइल मुथु अलागुराजा नामक दिहाड़ी मजदूर की शिकायत के बाद उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया गया।

इसके बाद पुलिस को इन दोनों के खिलाफ करीब 400 शिकायतें मिलीं, जिनमें इन्होंने शिकायतकर्ता के नाम से लोन की रकम हड़प ली थी। सोमवार को इस सिलसिले में पुलिस ने तीसरे संदिग्ध सन्नासी को गिरफ्तार किया। बीते मार्च में पीड़ित के एक रिश्तेदार गणेशन ने बैंक फर्जीवाड़े का पूरा काला चिट्ठा लिखा और इसकी शिकायत विरुधुनगर के जिलाधिकारी को सौंप दी।

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