पत्रिका की खबर के बाद अब अलग-अलग माध्यमों से पत्र सामने आ रहे हैं, जिसमें परिषद सम्मेलन निलंबित होने के नुकसान स्पष्ट नजर आ रहे हैं। कलेक्टर के दो ऐसे पत्र भी सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने परिषद निलंबन के बाद भी कामों पर स्वीकृतियां चाही गई थीं। निलंबन के 5 दिन बाद ही परिषद के एजेंडा के प्रमुख बिंदू में से एक डोर टू डोर कचरा प्रबंधन के लिए एजेंसी नियुक्त करने संबंधी प्रस्ताव का एक पत्र कलेक्टर ने 4 मार्च 2025 को सीधे आयुक्त नगरीय प्रशासन को भेजा था, जिसमें 5 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति मांगी गई थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को दूसरे प्रमुख बिंदू बेलाताल तालाब पर किए जाने वाले अतिरिक्त कार्य की 1 करोड़ की वित्तीय व प्रशासकीय स्वीकृति की मांग आयुक्त से की थी। इस पत्र में परिषद निलंबन का और एजेंडा में यह बिंदू होने की बात का उल्लेख भी किया था। इन दोनों विषयों को आयुक्त वापस नगरपालिका को भेजा, लेकिन आगे इन पर नोटशीट किसी से बनाई, क्योंकि दोनों बिंदू पहले से ही निलंबित सम्मेलन के एजेंडा में शामिल थे। इस तरह सम्मेलन का निलंबन भारी पड़ता नजर आया।