
lpg cylinder shortage (Photo Source - Patrika)
दमोह. गैस सिलेंडर की शॉर्टेज बने महीना बीत चुका है, लेकिन अब भी व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। आम उपभोक्ताओं को अब भी लाइन में लगना पड़ रहा हैं, क्योंकि उसके घर अधिकांश एजेंसी संचालक सिलेंडर नहीं पहुंचा रहे हैं। दूसरी समस्या 25 दिन में सिलेंडर का नंबर नहीं लग रहा है, डिलेवरी डेट यानि 30 से अधिक दिन के बाद नंबर लग रहा है, इसके बाद 35 से 40 वें दिन तक सिलेंडर लोगों को मिल पा रहा हैं, जिससे अधिकांश घरों में अब इंडक्शन और लकड़ी चूल्हा से भी काम होने लगा है। ऐसे ही हालात कॉमर्शियल सिलेंडर के हैं, जो होटल, रेस्टारेंट आदि के लिए रिजर्व तो किए गए हैं, लेकिन अभी भी आसानी से नहीं मिल पा रहा है। ऊपर से रेट बढऩे से अब दुकानदार भी दिलचस्पी नहीं दिखा हैं। अधिकांश दुकानें अब भट्टी पर शिफ्ट कर चुकी हैं। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी जिले में नहीं हैं। लोगों को पर्याप्त मात्रा में आसानी से पेट्रोल-डीजल मिल रहा हैं।
पत्रिका ने सुबह पुरानी गल्ला मंडी स्थित गुप्ता गैस एजेंसी, किल्लाई नाका के पास स्थित भारत गैस की एजेंसी, पटैरिया गैस एजेंसी सिविल वार्ड पहुंचकर स्थिति देखी। यहां बड़ी संख्या में लोग, महिलाएं सिलेंडर को लेकर लाइन में खड़े नजर आए। पहले पर्ची के लिए ऑफिस में लाइन, इसके बाद सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े लोग नजर आए। दोपहर में 12 बजे तक यहां ऐसी स्थिति देखने मिली। कुछ लोग गोदाम पर कुछ लोग सिलेंडर लेने पहुंचे, लेकिन यहां उन्हें गैस नहीं मिल सकी। लोगों के अनुसार वह यहां 3 से 4 दिन से चक्कर काट रहे हैं। उपभोक्ताओं के अनुसार 25 दिन में नंबर लगना बताकर 35 से 40 दिन में सिलेंडर मिल रहा है। इतने दिन एक परिवार में सिलेंडर नहीं चलता है। सिलेंडर अधिकतम 20 दिन ही चल रहा है। ऐसे में अब कुछ काम लकड़ी चूल्हा, तो कुछ काम इंडक्शन से करने पड़ रहे हैं। बहुत परेशानी हो रही है।
कलेक्टर और खाद्य आपूर्ति विभाग लगातार जिले में पर्याप्त और मांग से अधिक सिलेंडर होने का दावा करते नजर आ रहे हैं, लेकिन एजेंसियों पर लोग अब भी परेशान है। आम दिनों की तरह उन्हें पर्याप्त सिलेंडर कंपनी से मिल रहे हैं, इसके बाद भी शॉर्टेज बाजार में दिखाई जा रही हैं। कुछ एजेंसी संचालकों ने अब भी वेंडर के माध्यम से होने वाली सिलेंडर डिलेवरी शुरू नहीं की है। आम लोगों को आसानी से मिलने वाला सिलेंडर अब बमुश्किल दिया जा रहा हैं। ऐसे में एक पैनिक एजेंसी संचालकों द्वारा भी क्रिएट किया जा रहा है, जिससे लोग सबसे ज्यादा आशांकित हो रहे हैं। इधर, गैस सिलेंडर का स्टॉक भी एजेंसी संचालकों द्वारा किए जाने के आसार हैं, जिससे कि और रेट बढ़ते ही इन्हें कालाबाजारी कर अधिक रेट पर बेचा जा सके।
कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक के बाद अब करीब ९ प्रतिशत का रिजर्व होटल, रेस्टारेंट के लिए किया गया है। साथ ही इस सिलेंडर के रेट भी बढ़ गए हैं। ऐसे में आधा महीने से अधिक परेशानी झेल चुके दुकानदार अब भट्टी लगाकर खुश हैं। साथ ही कॉमर्शियल सिलेंडर के चक्कर में नहीं पड़ रहे हैं। होटलों पर इन दिनों इंडक्शन, माइक्रोवेव ओवन और भट्टियों का उपयोग तेज हो गया है। कुछ होटल और ढाबों पर भट्टियां फिर से चालू हो गई हैं। कुछ ढाबों पर फिर से चूल्हे ही रोटी भी मिलना शुरू हो गई है। जबकि भट्टियों से अन्य कार्य होने लगे हैं। शहर में अधिकांश होटलों में इस तरह के नजारे देखने मिलने लगे हैं। होटल संचालक सुमित चौरसिया ने बताया कि अब सभी काम भट्टी से ही हो रहे हैं। थोड़े काम इंडक्शन आदि से भी कर रहे हैं।
घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की शॉर्टेज के बीच कोयले और लकड़ी की खपत में 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। स्थानीय कोल व्यापारी मधुर हुडा ने बताया कि अभी तक कोयला का रेट नहीं बढ़ाया है। इस समय कोयला की डिमांड आम दिनों की अपेक्षा 25 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ गई है, जो भट्टियों में इसका उपयोग कर रहे हैं। साथ ही लकड़ी के गिट्टा भी अधिक उपयोग हो रहे हैं।
वर्शन
जिले में पेट्रोल-डीजल और सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में पहुंच रहे हैं। पेट्रोल डीजल की स्थिति पहले ही सामान्य हो चुकी है, अब सिलेंडर की स्थितियां भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
रचना प्रजापति, प्र. खाद्य आपूर्ति अधिकारी दमोह
Updated on:
07 Apr 2026 05:55 pm
Published on:
07 Apr 2026 05:53 pm
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