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एमपी में एक और टाइगर रिजर्व, यहां चीते भी बसाए जाएंगे

शासन से सहमति: वाइल्ड लाइफ की टीम लेगी जायजा, नौरादेही बनेगा प्रदेश का 7वां टाइगर रिजर्व, नामकरण पर जल्द होगा फैसला

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दमोह

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deepak deewan

Oct 18, 2022

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नौरादेही बनेगा प्रदेश का 7वां टाइगर रिजर्व

तेंदूखेड़ा. तीन जिले की सीमा से लगे प्रदेश का सबसे बड़ा नौरादेही अभयारण्य और सिंग्रामपुर के रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है. यह प्रदेश का 7वां व संभाग का दूसरा टाइगर रिजर्व होगा जोकि देश के सबसे लंबाई वाले टाइगर रिजर्व में भी शुमार हो जाएगा। शासन स्तर व राज्य वन्यप्राणी बोर्ड से सहमति मिल चुकी है। वाइल्ड लाइफ की एक टीम अभयारण्य में आकर क्षेत्र का जायजा लेकर रिपोर्ट देगी। इसके बाद काम आगे बढ़ेगा। यहां चीते भी बसाए जाएंगे.

1430 वर्ग किमी एरिया को टाइगर रिजर्व के लिए सुरक्षित किया जा रहा है। इसमें नौरादेही का वर्तमान 1197 वर्ग किमी और रानी दुर्गावती का 27 वर्ग किमी एरिया शामिल है। इसके अलावा नौरादेही से विस्थापित 23 राजस्व गांव से खाली जमीन थी। इसके दायरे में आ रही है। अभयारण्य से अभी 59 गांव का विस्थापन बाकी है। प्रस्तावित टाइगर रिजर्व में नौरादेही कोर एक एरिया रहेगा। टूरिस्ट यहां बाघों को काफी नजदीक से देखने के रोमांच का लुत्फ उठा सकेंगे।

नौरादेही में बाघ बाघिन से शावकों का जन्म और उनसे भी वंशवृद्धि होना सुखद संकेत है। चीता व अन्य वन्य प्राणियों के लिए अभयारण्य मुफीद है। चीतों का बाघ बाघिन से टकराव जैसी स्थिति बनने की आशंका भी नहीं है। बाघ बड़े जानवरों का शिकार करता है। जबकि चीता छोटे वन्य जीवों से पेट भरता है। वहीं नौरादेही अभयारण्य में नवंबर 2021 में बाघिन एन 1 ने 4 शावकों को जन्म दिया था लेकिन उस समय 2की पुष्टि हुई थी हाल ही में इस बाघिन के साथ 4 शावक देखे गए हैं। इस तरह पिछले 4 साल के अंतराल में बाघों की संख्या 2 से बढ़कर 12 हो गई है। कुछ समय पहले एक अन्य बाघ रातापानी की तरफ से यहां आकर बस गया है।

नौरादेही अभयारण्य डीएफओ सुधांशु यादव के अनुसार नौरादेही अभयारण्य और रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर 1430 वर्ग किमी एरिया को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस पर सहमति बन गई है। मुख्यालय से वाइल्ड लाइफ की एक टीम जल्द ही अभयारण्य आएगी जोकि तैयारियों को आकलन करके अपनी रिपोर्ट देगी। नौरादेही के 72 में से 23 गांवों का विस्थापन हो चुका है। शेष गांवों के विस्थापन का काम तेजी से चल रहा है। टाइगर रिजर्व के लिए हमारी तैयारी लगभग पूरी है।

चीतों को बसाने टाइगर रिजर्व बनाया
चीता परियोजना के तहत नौरादेही का चयन किया गया है। इसे अब चीते बसाने के लिए तैयार किया जा रहा है। दरअसल केन बेतवा लिंक परियोजना से 6017 हेक्टेयर वनभूमि डूब रही है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का 4141 हेक्टेयर कोर एरिया है। इसकी भरपाई नौरादेही व रानी दुर्गावती अभयारण्य बनाकर की जा रही है। नौरादेही अभयारण्य क्षेत्रफल में प्रदेश का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है। यहां राष्ट्रीय बाघ परियोजना की सफलता के कारण भी इसके टाइगर रिजर्व बनने का दावा मजबूत होता है। वन विभाग की वन्यप्राणी शाखा ने 1414 वर्ग किलोमीटर का कोर और 924 वर्ग किलोमीटर का बफर क्षेत्र प्रस्तावित किया है। इन दोनों अभयारण्य के बीच एक कॉरिडोर बनेगा। जो अब टाइगर रिजर्व का हिस्सा होगा। क्योंकि नौरादेही अभयारण्य में बाघ शिफ्टिंग के पहले अफ्रीकन चीतों को बसाने की तैयारी चल रही थी। हाल ही में कूनो में चीते लाए गए हैं। नौरादेही अभयारण्य में अभी भी चीता लाने की संभावनाएं तलाशी जा रही है। क्योंकि नौरादेही अभयारण्य में क्षेत्रफल के साथ चीतों के लिए अनुकूल वातावरण यहां पर उपलब्ध है।