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जेसीबी आखिर क्यों बन रही मजदूरों की दुश्मन

ज्यादातर रेत खदानों पर भारी मशीनों से कराया जा रहा है काम, मनरेगा में भी काम पर रोक

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दतिया

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monu sahu

Jun 07, 2018

Why JCB is the enemy of the workers

जेसीबी आखिर क्यों बन रही मजदूरों की दुश्मन

दतिया/सेंवड़ा. मजदूरों के हक पर डाका डाला जा रहा है और खनिज नीति की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जो काम मनरेगा के तहत मजदूरों से कराया जाना चाहिए उसे जेसीबी व भारी भरकम मशीनों से कराया जा रहा है। इसमें न केवल ठेकेदारों की मिलीभगत है बल्कि वन ,खनिज व राजस्व विभाग के अफसरों की भी सुस्ती दिखाई दे रही है।
जबकि प्रावधान है कि नदी में मशीनों का प्रवेश उसी दशा में कराया जा सकता है जब या तो मिट्टी या पत्थर हटाना हो। बावजूद इसके जिले की हरेक खदान में इस नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। दतिया ,भांडेर समेत सेंवढ़ा की भीकमपुरा खदान में मशीनों से खुले आम रेत निकाली जा रही है।

नदियों से रेत निकालने के पीछे सरकार के दो मकसद हैं। एक तो लोगों को भवन निर्माण के लिए रेत मिल सके ,दूसरा यह कि इस रेत से निकालने पर गांव के लोगों को रोजगार मिले। इसके लिए महात्मा गांधी रोजगार योजना (मनरेगा ) के तहत गांव वालों को रोजगार दिया जा सके। पर जिले के हालत इस मामले में ठीक नहीं हैं। यहां चल तो रहीं हैं जिले की 20 ग्राम पंचायतों में रेत खदानें पर यह दुर्भाग्य ही है कि इससे मजदूरों को रोजगार मिलना तो चाहिए पर मजदूरों को निराशा ही हाथ लग रही है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चाहे दतिया ब्ल ाक हो या फिर सेंवड़ा व भांडेर। नदी व अन्य रेत के घाटों पर पर जो काम तसले -फावड़ों से किया जाना चाहिए वह काम किया जा रहा है बड़ी-बड़ी मशीनों से। हैरानी की बात यह है कि मामले की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को ही फिर भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे हर रोज सैकड़ों मजदूरों का रोजगार छिन रहा है।

यह है नियम
खनिज विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक खनिज नीति में यह प्रावधान है कि रेत निकालने के बीच मेें अगर मिट्टी या पत्थर बाधा बन रहे हैं तो उन्हें जेसीबी की मदद से बाहर निकाला जा सकता है पर रेत केवल मजदूरों द्वारा ही निकलवाई जाएगी ताकि उन्हें केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत रोजगार दिया जा सके। इसमें गड़बड़ी हो रही या नहीं यह देखना काम है खनिज विभाग ,राजस्व व वन विभाग के अधिकारियों का पर देखा जा रहा है कि तीनों विभाग ही इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं देते और दिन पर रेत के उत्खनन की मात्रा तो बढ़ ही रही है मशीनों की संख्या भी कम नहीं है।

रेत नहीं भर सकते
खनिज नीति के तहत यह प्रावधान है कि रेत निकालनेे में अगर मिट्टी व पत्थर बाधा बन रहे हैं तो उन्हें मशीनों से हटाया जा सकता है पर रेेत को तो मजदूरों से ही भराया जाने का नियम है।
सुरेश कु लस्ते , प्रभारी खनिज अधिकारी