—दो से ढाई लाख सालाना की हो रही आय दौसा जिले की खटवा निवासी महिला किसान रूबी पारीक अजोला घास का उत्पादन कर रही हैं। इसे बेचकर उन्हें दो से ढाई लाख रुपए प्रतिवर्ष की आमदनी हो रही है।
पशुपालकों की बढ़ रही आमदनी
पशुओं के लिए वरदान साबित हो रहे अजोला घास चारे से पशुपालकों की भी आय बढ़ रही है। कम पानी व कम जगह में होने से इससे कम लागत में ही अधिक मुनाफा होता है। इस चारे के सेवन से पशुओं के दूध में अधिक फैट आ रहा है।
प्रशिक्षण से मिला लाभ
किसान रूबी ने कृषि विज्ञान केन्द्र, अजमेर से अजोला फर्न चारे के उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद चार क्यारियों से इसकी शुरुआत की। इससे प्रति वर्ष 50 हजार से एक लाख की आय होने लगी। अब एक दर्जन क्यारियों में अजोला उत्पादन से पांच क्विंटल तक अजोला फ र्न चारा मिल रहा है।
दूध की बढ़ती गुणवत्ता
यह चारा खाने से पशुओं के दूध की गुणवत्ता बढ़ जाती है। चारा पशुओं को खिलाने पर पशु को बाट आदि देने की आवश्यकता नहीं पडती है। किसान को अजोला फ र्म चारा बेचकर किसान को प्रति वर्ष दो से ढाई लाख आय हो रही है।
एक बार बोने के बाद छह माह तक उत्पादन
इसकी बुवाई के लिए एक क्यारी में पानी भरने के बाद उसमें गोबर का खाद डाला जाता है। फिर अजोला फ र्न चारे की बुवाई की जाती है। सप्ताहभर बाद उत्पादन शुरू हो जाता है। एक क्यारी से प्रति दिन 5 से 8 किलो अजोला घास चारे का उत्पादन होता है। यह छह माह तक चलता है। क्यारी के पानी को निकालकर बचे खाद को खेत में डालने से वह डीएपी का काम करता है।
संतोष शर्मा —नांगल राजावतान