लालसोट. मूंगफली की आवक ने जोर पकडऩे के साथ ही लालसोट मंडी में रौनक नजर आने लगी है। गत सप्ताह से ही लालसोट मंडी में मूंगफली की आवक शुरू हुई थी और कुछ ही दिनों में आवक ने एक साथ जोर पकड़ लिया है। मंगलवार को लालसोट मंडी में 10 हजार बोरी के अधिक मूंगफली की आवक हुई है। सुबह से मंडी मेें सैकड़ों किसान अपने अपने वाहनों में मूंगफली लेकर मंडी पहुंचे। इसके चलते पूरी मंडी में चहल पहल नजर आई और आढतियों की दुकानों के आगे मौजूद प्लेटफार्म एवं रोड पर जगह जगह मूंगफली की ढेरियां ही लगी रही।
ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नवल झालानी, पूर्व अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, सत्यनारायण चैनपुरा, दिनेश कालूवास,लाला सौखियां, राजू चौधरी, देवकी भिंवाल एवं शंभू चौण्डियावास समेत कई आढतियों ने बताया कि मंगलवार को मंडी में 5 हजार से 6 हजार 200 रुपए प्रति क्विंटल के दाम से मूंगफली बिकी है, गत वर्ष भी लगभग यही भाव रहे थे, फिलहाल ग्रामीण इलाकों में मूंगफली की कटाई का क्रम जोर शोर से जारी है। इसके चलते अनुमान है कि दस दिनों में यह आवक बढकर 20 से 25 हजार बोरी तक भी पहुंचेगी।आवक बढने के साथ भी भाव थोड़े कम भी होने का अनुमान है। आवक कम होने से फिलहाल स्थानीय खरीदार ही मंडी में मूंगफली की खरीद कर रहे है, आवक बढने के बाद भाव थोड़ कम होने की संभावना है।
दूसरी ओर दिवाली से करीब डेढ माह मंडियों में नई जिंसों की आवक का असर क्षेत्र के के बाजार में भी असर पडऩे वाला है। आढतियों का मानना है कि मंडी में मूंगफली समेत अन्य जिंसों की आवक से पूरे बाजार के व्यापार का रोटेशन घूमेगा और फसल बेचने के बाद किसान आगामी त्योहार व शादियों के सीजन के दौरान निश्चित रुप से बाजार से अपने परिवार की जरुरत के अनुसार खरीदारी भी करेगा। (नि.प्र.)
गत वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत कम पैदावार
इस बार बारिश की बेरुखी ने किसानों से लेकर आढतियों तक के अरमानों पर पानी फेर दिया है। ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन अध्यक्ष नवल झालानी के अनुसार गत वर्ष से इस बार मूंगफली की 25 प्रतिशत पैदावर कम है। बारिश नही होने से मूंगफली के दाने की क्वालिटी पर गहरा असर पर पड़ा है। गत वर्ष मूंगफली में दाने का औसत 75 से 78 दाने तक था, इस बार यह मात्र 65 से 68 ही रह गया है। दाना कमजाेर होने से इस बार अन्य प्रदेशों से डिमांड कम रहने की उम्मीद है।
किसानों ने कहा,आधी फसल खराब हो गई है, इस बार तो लागत व मजदूरी भी नही निकली है
मंडी मेें मूंगफली बेचने के लिए आए अधिकांश किसानों के चेहरों से रौनक गायब नजर आई। मंडी में मौजूद किसानों से जब पत्रिका संवाददाता ने बात की तो उनका दर्द भी छलक पड़ा। रामगढ पचवारा के राजेश, रामसिंहपुरा के सीताराम, सलेमपुरा के अर्जुनलाल एवं निर्झरना के रामसहाय ने बड़े ही दुखी अंदाज में बताया कि समय पर बारिश नहीं होने से मूंगफली में दाना कमजोर है, उसके बाद सफेद लट ने फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा दिया, जिससे चौथाई से लेकर आधी फसल तक खराब हो गई है, कई किसानों ने खेतों में मौजूद फसल पर आरा ही चला दिया है।
बाजरे पर लगातार दूसरी साल बारिश की मार
लालसोट के साथ व मंडावरी मंडी में बाजरे की आवक ने जोर पकड़ लिया है, लेकिन लगातार दूसरी साल बाजरे पर बारिश की मार हुुई है, गत वर्ष कटाई के समय जोरदार बारिश होने से क्वालिटी डेमेज हो गई थी, इस बार बारिश ने धोखा दे डाला, जिससे पैदावार प्रभावित हो गई। मंडावरी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रामजीलाल गांधी ने बताया कि मंडावरी मंडी में 7 से 8 हजार कट्टों की आवक है। बुवाई के समय बारिश होने से शुरुआत में फसल को काफी नुकसान हो गया है, उसके बाद बारिश नहीं हुई है। इसके चलते पैदावार गत वर्ष के मुकाबले कम रहेगी। फिलहाल मंडी में बाजरा 1850 से 2250 रुपए प्रति क्विंटल के दाम पर बिक रहा है।(नि.प्र.)