
दौसा. सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के दूसरे दिन भी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतरी रही। जिले में पदस्थापित अधिकांश चिकित्सक मंगलवार को भी काम पर नहीं आए। ऐसे में आउटडोर एवं इनडोर में मरीजों की संख्या भी सीमित हो गई। वार्डों में भर्ती मरीज मजबूरी में छोड़कर चले गए एवं गंभीर मरीजों को अन्यत्र रैफर कर दिया। ऐसे में मरीजों एवं उनके परिजनों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार जिले में 202 चिकित्सक कार्यरत हैं। इनमें से 195 चिकित्सक हडताल में शामिल हो गए। केवल 7 चिकित्सक ही काम पर आए। इससे जिलेभर के अस्पतालों में आउटडोर मरीजों की संख्या रोजाना औसतन 7 हजार से गिरकर करीब 3 हजार ही रह गई। सबसे ज्यादा परेशानी विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं होने के कारण हुई। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पताल एवं झोलाछापों का सहारा लेना पड़ा।
जिला अस्पताल में सोमवार को एसएमएस से आए तीन चिकित्सक भी मंगलवार को नहीं आए। खास बात यह है कि 8 नवचयनित चिकित्सक भी काम पर नहीं आए। उल्लेखनीय है कि राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की ओर से 33 सूत्री मांगों को लेकर चिकित्सक 6 नवम्बर से सामूहिक हड़ताल पर चले गए एवं रेस्मा लागू होने के कारण भूमिगत तक हो गए। ऐसे में मरीज चिकित्सकों को घर पर भी नहीं दिखा पा रहे हैं।
जिला अस्पताल के वार्डो में भर्ती कुछ मरीजों को छुट्टी दे दी गई। कुछ मरीजों को परिजन अपनी इच्छा से ले जाने एवं किसी भी परेशानी की जिम्मेदारी स्वयं की लिखकर वार्ड ही छोडकर चले गए। ऐसे में मंगलवार को सर्जिकल वार्ड से 25, मेडिकल वार्ड से 7 एवं शिशु वार्ड से 7 मरीज डिस्चार्ज हुए। खचाखच भरे रहने वाले इन वार्डों में मंगलवार शाम को 11 मरीज ही भर्ती रहे। नौ प्रसूता महिलाओं को भी रैफर करना पड़ा।
चार निजी अस्पतालों में ले सकते हैं परामर्श
मरीजों को हो रही परेशानी के मद्देनजर चिकित्सा विभाग ने जिले के कृष्णा हॉस्पिटल दौसा, गोयल हॉस्पिटल महुवा, मधुर एवं कट्टा अस्पताल बांदीकुई में सरकारी अस्पताल की ओपीडी पर्ची ले जाकर नि:शुल्क परामर्श लेने की सुविधा प्रदान की है। इन्हें दवाइयां सरकारी डीटीसी सेन्टर से ही मिलेगी।
कलक्टर कर सकेंगे चिकित्सकों की भर्ती
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि व्यवस्था बनाने के लिए वॉक इन इंटरव्यू के आधार पर संविदा पर 50 हजार रुपए प्रतिमाह पर चिकित्सक लगा सकते हैं। इसके अलावा पहले संविदा पर लगाए गए चिकित्सकों की सैलेरी भी 30 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दी गई है।
आयुष चिकित्सक लिख रहे ऐलोपैथी दवा
मरीजों को परामर्श देने के मकसद से जिले में 34 आयुष चिकित्सकों को विभिन्न अस्पतालों में लगाया है। ऐसे में ये चिकित्सक ऐलोपैथी की दवाइयां लिख रहे हैं। मरीज भी इनसे परामर्श लेने से कतरा रहे हैं।
Published on:
07 Nov 2017 08:19 pm
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