
Kanwar Mela 2019
(देहरादून,हर्षित सिंह): आज से सावन मास ( Savan ) का आगाज हो गया है। इसी के साथ उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा ( Kanwar Yatra 2019 ) आज शुरू होने वाली है। यात्रा की तैयारियां लगभग पूरी चुकी है। हजारों की संख्या में मंगलवार को कांवडिए हरिद्वार व आसपास के इलाकों में जुटने शुरू हो गए। इस बार लगभग तीन करोड़ कांवडियों के देवभूमि में आने की संभावना है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
लक्ष्मण झूला बंद, अब ये रहेगी कावाडियों की अवाजाही की व्यवस्था
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ( CM Trivendra Singh Rawat ) ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान लक्ष्मण झूला ( Laxman Jhula ) पुल के विकल्प के रूप में रामझूला ( Ram Jhula ) , आई.डी.पी.एल पुल तथा मोहन चट्टी का डवल लेन पुल कांवड यात्रियों द्वारा उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा मार्गों की मरम्मत के साथ ही मार्गों के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया गया है। पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विकास किया गया है।
थाने में देनी होगी यात्रा की जानकारी
इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी कांवडियों को अपने थाने में अपने कांवड में आने की जानकारी देनी होगी। थाने से उन्हें पंजीकरण नम्बर उपलब्ध कराया जाएगा। इसकी पुष्टि रास्ते में आने वाले चेकिंग पोस्ट पर की जाएगी।
30 जुलाई तक गूंजेगा 'बम बम भोले' का उद्घोष
बता दें कि 12 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 30 जुलाई को श्रावण शिवरात्रि ( Shivratri ) पर शिवालयों में जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी। कांवड़ यात्रा का मुख्य केंद्र तीर्थनगरी हरिद्वार है, हांलाकि दून घाटी के हरिद्वार के करीब होने यहां भी हरिद्वार जैसा माहौल रहता है। हर तरफ बम बम भोले की गूंज रहती है।
मुख्य मेला हरिद्धार में
कांवड़ यात्रा के दौरान मुख्य मेला हरिद्धार ( Haridwar Kanwar Yatra ) में लगता है। देश के अलग-अलग इलाकों से श्रद्धालु हरिद्धार ( Haridwar Kanwar Mela ) पहुंचते हैं। यहां से गंगा का पवित्र जल ले जाकर भगवान शिव का अभिषेक करते है।
गोमुख से गंगाजल लाने के लिए यह रहेगा रूट ( Kanwar Yatra Route )
इसी के साथ कई श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए गंगा के उद्गम स्थान गंगोत्री ( Gangotri ) व गोमुख के लिए भी जाते हैं। राज्य के बाहर से आने वाले वह श्रद्धालु जो गोमुख जाना चाहते हैं पहले हरिद्धार पहुंचते है। यहां से ऋषिकेश ( Rishikesh ) होते हुए गंगोत्री और गोमुख पहुंचते है। कई कांवडिए दून घाटी से होते हुए भी गंगोत्री व गोमुख जाते हैं। दून में कई प्राचीन शिवालय हैं जहां कांवडिए मत्थ टेंकते हुए आगे बढ़ते हैं। इनमें टपकेश्वर महादेव मंदिर, बाबड़ी शिव मंदिर, जंगम शिवालय का विशेष महात्मय है।
Published on:
17 Jul 2019 07:00 am
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