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(देहरादून): देश में अब हर नर्स को ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। हर पांच साल में इस पंजीकरण का नवीनीकरण किया जाएगा। इसी महीने से देशभर में इंडियन नर्सिंग काउंसिल(नर्सेज रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम) रेगुलेशंस एक्ट 2019 लागू हो गया है। इस अधिनियम के तहत नर्सों के लिए नई व्यवस्था की गई है। उत्तराखंड में भी यह व्यवस्था लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने कहा कि इस संबंध में व्यस्था बनाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
देश में जो भी नर्स जहां काम कर रही हैं, उन्हें अपने नजदीकी स्टेट नर्सिंग काउंसिल में जाकर पंजीकरण कराना होगा। नर्सों के लिए आए इस अधिनियम का फायदा यह होगा कि पूरे देश में कहीं से भी वह अपनी कोई भी कागजी कार्रवाई ऑनलाइन कर सकेंगे। अभी तक एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। दूसरी ओर, नर्सों को देश में कहीं भी ट्रैक करना आसान हो जाएगा। इस पंजीकरण के लिए 10वीं की मार्कशीट के साथ ही आधार कार्ड भी अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया आधार आधारित बायोमीट्रिक उपस्थिति का हिस्सा होगी। पंजीकरण के बाद हर नर्स को एक यूनिक आईडी जारी की जाएगी। यह आईडी पूरे देश में मान्य होगी। हालांकि, अगर किसी नर्स को एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना होगा तो इसके लिए भी ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इससे जहां पहले राज्य से एनओसी मिल जाएगी तो दूसरी ओर जिस राज्य में जाना है, वहां का पंजीकरण भी हो जाएगा।
हर पांच साल में इस पंजीकरण का नवीनीकरण करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के लिए शुल्क भी तय किया गया है। एएनएम पासआउट के पंजीकरण के लिए एक हजार रुपये और जीएनएम व बीएससी नर्सिंग वालों के लिए दो हजार रुपये शुल्क तय किया गया है। नवीनीकरण के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा। नर्सिंग की उच्च शिक्षा लेने पर इसे अपडेट कराने के लिए भी 1000 रुपये शुल्क देना होगा। नवीनीकरण में छह माह से अधिक का विलंब होने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा।
Published on:
22 May 2019 08:02 pm
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