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वन भूमि पर बसे लोगों को मिलेगा भूमिधरी अधिकार, हजारों परिवारों को मिलेगी राहत, प्रस्ताव लाएगी सरकार

Landholder Rights : वन भूमि पर काबिज लोगों को भूमिधरी का अधिकार मिलने वाला है। सरकार ऐसे भूखंडों को गैर आरक्षित वन भूमि घोषित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाएगी। इससे राज्य भर में हजारों परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा।

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People living on forest land in Uttarakhand will get land ownership rights

विधान सभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जवाब देते सीएम पुष्कर सिंह धामी

Landholder Rights : वन भूमि पर बसे हजारों लोगों को सरकार बड़ा तोहफा देने जा रही है। संसदीय कार्य एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बुधवार को सदन में यह घोषणा की। कांग्रेस ने नियम 58 के तहत इस मुद्दे को रखा था। मंत्री उनियाल ने कहा कि वन, नजूल भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर बसे लोगों की समस्याओं का सरकार ने संज्ञान लिया है। बिंदूखत्ता, बापूग्राम व अन्य स्थानों पर वन भूमि पर बसे लोगों को जल्द राहत दी जाएगी।उन्होंने कहा कि यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। टिहरी बांध विस्थापितों को दी गई जमीन को गैर आरक्षित वन भूमि घोषित कर दिया गया है। अब इसे राजस्व भूमि घोषित किया जाएगा। जल्द उन्हें भूमिधरी का अधिकार मिल जाएगा।नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि दशकों से बसे लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। आर्य ने कहा कि वन संरक्षण एक्ट 1980 में अस्तित्व में आया था। इससे पहले से वन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को बेदखल किया जा रहा है। चमोली की पिंडर घाटी में 800, देवाल में 473 और नारायणबगड़ के 800 परिवारों को वन विभाग ने बेदखली के नोटिस दिए हैं। उन्होंने इसे बड़ी विडंबना करार दिया।

अमीर मॉल बना रहे, गरीबों पर सितम

विधान सभा सत्र में विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि मंगलौर क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नजूल भूमि है। यहां दलितों के घरों को ध्वस्त किया गया। नजूल भूमि पर पैसे वाला तो मॉल बना लेगा, लेकिन गरीब घर नहीं बना सकता। विधायक विक्रम सिंह नेगी ने कहा कि टिहरी बांध के लिए पहाड़ के जिन लोगों को उनके घर-गांव से उजाड़कर हरिद्वार में बसाया गया, उन्हें आज तक भूमिधरी अधिकार नहीं मिला। प्रीतम सिंह, हरीश धामी, अनुपमा रावत समेत अन्य कांग्रेसी विधायकों ने भूमिधरी अधिकार देने की मांग की।

प्रवर समिति को भेजें तीन विधेयक

कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने विधानसभा में पेश देवभूमि परिवार रजिस्टर विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इस रजिस्टर से लोगों की निजी जानकारियां सार्वजनिक होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार राजनैतिक आधार पर इस विधेयक को पारित कराना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग उठाई। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने जवाब में कहा कि रजिस्टर में दर्ज जानकारी को सुरक्षित रखने के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की जरूरत नहीं है। अन्य दो विधेयक भी समिति को नहीं भेजे गए।