
मुख्य सचिव आनंदवर्द्धन
Earthquake Risk : प्रदेश में भूकंप का खतरा और भी बढ़ गया है। बता दें कि उत्तराखंड में भूकंप की घटनाएं दिन पर दिन बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए उत्तराखंड को भूकंप के जोन-6 में शामिल कर दिया गया है। मंगलवार शाम मुख्य सचिव आनंदवर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूकंप के खतरों से निपटने पर मंथन किया गया। मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य को भूकंप के जोन-छह में शामिल किया गया है। इसे देखते हुए जल्द ही बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन किया जाएगा। इसके लिए 15 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। समिति में सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार को अध्यक्ष जबकि डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक नियुक्त किया गया है। अभी राज्य के बिल्डिंग बायलॉज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण (आईएसओ 1893-2002) पर आधारित हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि, उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा जोखिम को देखते हुए निर्माण नियमों को अधिक व्यावहारिक और वैज्ञानिक बनाना अनिवार्य हो गया है। इसके तहत भूकंपरोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच और स्ट्रक्चरल सेफ्टी पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक निर्माण शैली को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना, पर्यावरण संरक्षण और विंड लोड जैसे मानकों को शामिल करना।
समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति वास्तुविदों के साथ ही विभिन्न अभियंताओं से भी विचार-विमर्श करेगी। समिति का उद्देश्य राज्य के मौजूदा बायलॉज का गहन अध्ययन करते हुए उन्हें वर्तमान भूकंपीय मानकों, जलवायु परिस्थितियों और आधुनिक निर्माण तकनीकों के अनुरूप तैयार करना है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन निर्माण के नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है। राज्य सरकार भवन बायलॉज को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और आपदा-सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। समिति भवन बायलॉज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने के लिए अपने सुझाव देगी। उन्होंने कहा कि संशोधित नियमों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आपदा जोखिम में कमी आएगी। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। उन्होंने बताया कि संशोधित बिल्डिंग बायलॉज में भूकंप-रोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय पारंपरिक निर्माण तकनीकों और जलवायु अनुकूल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सतत एवं आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित हो सके।
Updated on:
25 Feb 2026 09:04 am
Published on:
25 Feb 2026 08:59 am
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