
सीएम पुष्कर सिंह धामी
Regularization : विभिन्न विभागों में दैनिक और संविदा पर कार्यरत हजारों कर्मियों को जल्द ही खुशखबरी मिलने वाली है। सरकार दैनिक और संविदा आधारित कर्मचारियों के विनियमितीकरण, संविदा कर्मचारियों को परमानेंट करने की नई कट ऑफ भी जल्द तय होने जा रही है। बताया जा रहा है कि कैबिनेट की उप कमेटी में वर्ष 2022 से पहले तक नियुक्त हो चुके कार्मिकों को इसके दायरे में लाने पर सहमति बनी है। कमेटी अभी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंची है। इस विषय पर अभी समिति की कुछ और बैठक प्रस्तावित हैं। बैठक में बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। उसके उसके साथ ही सरकार इस संबंध में आदेश भी जारी कर देगी। वहीं उपनल कर्मचारियों को समान कार्य का समान वेतन देने के फैसले के बाद अब सरकार वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों को भी राहत दे सकती है।
वन विभाग के दैनिक श्रमिकों का भी मानदेय बढ़ने वाला है। इनका न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये तय हो सकता है। वर्तमान में श्रम विभाग के मानक के अनुसार श्रमिकों को 12539 से 14 हजार 23 रुपये मानदेय मिलता है। कटौतियों के बाद यह राशि और भी कम हो जाती है। दैनिक श्रमिकों की संख्या 700 से ज्यादा है। पिछले काफी समय से इनके मानदेय को संशोधित करने पर विचार किया जा रहा है। अब उपनल, दैनिक-संविदा कर्मियों के मानदेय-सेवा आदि तय करने के लिए गठित कैबिनेट की सब कमेटी ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। वन मंत्री सुबोध उनियाल स्वयं इस कमेटी के अध्यक्ष हैं। इस प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट में लाने की तैयारी है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय इंटर कॉलेजों में कार्यरत सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड के प्रोन्नत वेतनमान के पुनर्निर्धारण के आदेश पर रोक लगा दी है। एकलपीठ ने अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय करते हुए , सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में बुधवार को सुनवाई हुई। याची सेवक सिंह, गोपाल दत्त पंत, प्रमोद कुमार, धरमराम आर्य, प्यारे लाल साह आदि ने इस संबंध में याचिकाएं दाखिल की। जिसके जरिए सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संशोधन 2025 एवं वित्त सचिव की ओर से प्रोन्नत वेतनमान का पुनर्निर्धारण करने के संबंध में 18 दिसंबर 2025 को जारी आदेश को चुनौती दी थी।
Updated on:
22 Jan 2026 09:05 am
Published on:
22 Jan 2026 09:04 am
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