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मुंबई। देश की आर्थिक
राजधानी में मुंबई में रियल एस्टेट मार्केट में सुस्ती के चलते एक करोड़ के दो
तिहाई से ज्यादा फ्लैट्स के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। दरअसल मुंबई शहर में बने
फ्लैट्स ज्यादातर खरीददारों की पहुंच से बाहर है। फि लहाल मुंबई में इस कैटिगरी में
तकरीबन 33,500 रेजिडेंशल अपार्टमेंट्स हैं।
एक प्रॉपर्टी कंसल्टेट के मुताबिक,
दूसरी तिमाही में लांच हुए मुंबई के तकरीबन 83 फीसदी फ्लैट्स इसी कैटिगरी में हैं।
हालांकि शहरों के बाहरी इलाकों में नए रेजिडेंशल प्रॉजेक्ट्स के लांच के कारण इस
हिस्सेदारी में थोड़ी कमी आई है, जो अप्रैल के आखिर में 90 फीसदी थी। बहरहाल, अब भी
यह आंकड़ा काफी ऊंचा है क्योंकि शहर के काफी कम लोग 1 करोड़ से ज्यादा का फ्लैट
खरीदने की क्षमता रखते हैं।
जेएलएल इंडिया के सीओओ और इंटरनेशनल डायरेक्टर
रमेश नायर ने बताया, "फिलहाल अपार्टमेंट्स साइज घटाने और कंस्ट्रक्शन कॉस्ट को
तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, ताकि मुंबई में घर खरीदने वालों की संख्या बढ़ सके।"
पिछले कुछ साल में डिवेलपर्स लगातार फ्लैट्स के साइज में कटौती कर रहे हैं, ताकि घर
खरीदने की हसरत रखने वाले ज्यादा से ज्यादा लोगों के बजट में फ्लैट्स आ सकें।
पिछले
5 साल में मुंबई में फ्लैट्स की औसत साइज में कटौती सबसे ज्यादा रही है। भारत के
बाकी शहरों के मुकाबले मुंबई में ऎवरेज यूनिट साइज सबसे कम है। घर खरीदारों को
लुभाने के लिए डिवेलपर्स अपार्टमेंट साइज घटाने के अलावा अन्य स्ट्रैटिजी भी तैयार
कर रहे हैं।
Published on:
25 Sept 2015 01:54 pm
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