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देवास

दर्जनों पर्यटन स्थल, विकसित एक भी नहीं, न सुविधाएं न सुरक्षा के इंतजाम

वन क्षेत्रों में हैं कईं आकर्षक स्थान, न वन विभाग ने ध्यान दिया न जनप्रतिनिधियों ने, बड़ी संख्या में पहुंचते हैं लोग

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देवास. जिले के वनक्षेत्रों में कई ऐसे स्थान हैं जहां बारिश के दिनों में बड़ी संख्या में लोेग पहुंचते हैं। वनक्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम व अन्य सुविधाएं न होने से कई बार लोगों को परेशानी भी होती है। अकेले बागली अनुभाग की बात की जाए तो यहां वनक्षेत्र में कई ऐसे स्थान हैं जहां बारिश के दिनों में आकर्षक नजारा रहता है। यहां सघन वन में झरनों के अलावा एक दर्जन से अधिक पर्यटक व धार्मिक महत्व के स्थान हैं। इन्हें विकसित करने और यहां सुविधाएं बढ़ाने के लिए न तो जनप्रतिनिधियों ने कभी पहल की न वनविभाग ने। देशी पर्यटन की दृष्टि से इन स्थानों को विकसित करने की जरूरत है।इन स्थानों तक सड़क मार्ग सहित आवासीय व खानपान की सुविधाएं मिलने लगे तो यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बरसों से इन क्षेत्रों को पर्यटन के हिसाब से बढ़ावा देने की मांग होती रही लेकिन न भाजपा न कांग्रेस सरकार ने इस ओर ध्यान दिया।

पहुंच मार्गों की हालत खराब

बागली अनुभाग के वनक्षेत्र में इंदौर, देवास सहित जिले के अन्य क्षेत्रों से पर्यटक बारिश के दिनों में पहुंचते हैं लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव में उन्हें परेशानियां होती है। वनक्षेत्र में दूरसंचार सुविधा सहित खान-पान व रुकने जैसी सुविधाओं का अभाव है। क्षेत्र के लगभग सभी गांव सड़कों से जुड़े हैं लेकिन पर्यटक स्थलों तक पहुंचने के रास्ते कच्चे व उबड़-खाबड़ हैं। साथ ही यहां सुरक्षा के भी इंतजाम नहीं है।

ये स्थल हैं जिले में

बागली अनुभाग की बात करें तो नर्मदा नदी खंडवा ज़िले को विभाजित करती है। क्षेत्र में प्रमुख रूप से धाराजी, कावड़िया पहाड़, खारी नदी, तरानिया, रामपुरा नर्मदा, जोशी बाबा का जंगल, जटाशंकर, पारस डेम, बोरी बांध,चंद्रकेश्वर तीर्थ, भेसूडा पर्वत व देवस्थान, श्री भौमियाजी हनुमान, श्री छत्रपति हनुमान मंदिर, बरझाई घाट, सिपाही खोदरा, सीतामाता मंदिर और सीता समाधि स्थल, कनेरी माताजी सहित अन्य पर्यटन और धार्मिक महत्व के स्थल है। वहीं ज़िले की सीमा से सटे हुए क्षेत्र में घने वन क्षेत्र में जयंती माताजी व बड़वाह तहसील में ओखला धाम स्थित है। इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों की बात करें तो सोनकच्छ क्षेत्र का दौलतपुर जंगल, सतवास क्षेत्र में नर्मदा नदी किनारे किटी, हरणगांव के समीप सतनगरी भी ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

नर्मदा परिक्रमा यात्री भी पहुंचते हैं

बागली के वनक्षेत्र की बात करें तो इस क्षेत में आम लोगों के अलावा नर्मदा परिक्रमा करने वाले यात्री भी बड़ी संख्या में निकलते हैं। यात्री पीपरी-रतनपुर होते हुए वनक्षेत्र से खंडवा जिले के जयंती माता जाते हैं। वनक्षेत्र में इन यात्रियों के लिए भी कोई सुविधाएं नहीं हैं। रतनपुर के बाद यात्रियों को सीधे जयंती माता मंदिर में ही सुविधाएं मिलती है।

-बागली विधानसभा में बड़ा वनक्षेत्र है। वनक्षेत्र में कई दर्शनीय स्थान हैं। मैंने वनविभाग को इको पॉइंट विकसित करने के लिए कहा है। पर्यटक स्थलों पर चौकीदार सहित अन्य इंतजाम करने के लिए भी कहा है। ये क्षेत्र विकसित होता है तो क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।-पहाड़सिंह कन्नौजे, विधायक, बागली

-देवास जिला वनसंपदा से समृद्ध है। यहां नैसर्गिक सुंदरता की दृष्टि से हमने सात स्थानों का चयन किया है। इनमें दौलतपुर, खिवनी अभयारण्य, दावतपुरा, कावडि़या पहाड़, रामपुरा, किटी को इको टूरिज्य के रूप में वैकसित किया जाएगा।-प्रदीप शुक्ला, डीएफओ