
गैस एजेंसी संचालक नहीं दे रहे सर्विस से उपभाक्ताओं को हो रही परेशानी, फिर भी अधिकारी कर रहे अनदेखा
शहर के अलावा ग्रामीण परिवेश में भी काफी बदलाव आ गया है। अब गृहणियां लकड़ी के चूल्हा में धुएं के बीच भोजन बनाना नहीं चाहती।
वे गैस सिलेंडर को पसंद को रही है। उल्लेखनीय है कि जब से प्रधानमंत्री उज्जवला योजना शुरू हुई है, तब से जिले में घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। तीन साल पहले में उपभोक्ताओं की संख्या करीब ५० हजार थी, जो अब बढक़र १ लाख २० हजार हो गई है। जिले में ११ गैस एजेंसी है, जहां से गैस सिलेंडर की सप्लाई होती है। उपभोक्ताओं की संख्या बढऩे के साथ ही शिकायत भी बढ़ गई है। अधिकांश गैस एजेंसी संचालक ठीक से सर्विस नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उपभाक्ताओं को भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो घर पहुंच सेवा का बुराहाल है। समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने पर गृहणियां खाना नहीं बना पाती।
सहायक अधिकारी, अरविंद दुबे ने बताया गैस एजेंसी संचालकों के खिलाफ कोई शिकायत नही मिली। लगातार विभागीय अधिकारी मानिटरिंग कर रहे हैं।
खाद्य विभाग के सूत्रों की माने तो प्रधानमंत्री उज्जवला योजना शुरू होने के बाद से चूल्हा, पाइप आदि के संबंध में शिकायत मिल रही है। कुछ उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि चूल्हा का बटन ठीक से काम नहीं करता। पाइप की क्वालिटी भी ठीक नहीं है। गैस एजेंसी में इसके संबंध में शिकायत करने के बाद भी नया बदलकर नहीं दिया जा रहा है। ऐसे भी कुछ ऐेसे भी उपभोक्ता है, जिन्होंने रिफलिंग कराने पर चिल्हर नहीं देने की शिकायत की है।
खाद्य विभाग के अधिकारी गैस एजेंसी संचालकों पर मेहरबान है। पिछले दिनों एक गैस एजेंसी द्वारा प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के नाम पर कुकरेल समेत अन्य गांवों में हितग्राहियों से राशि लिए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद भी न तो मामले की जांच की गई और न ही गैस एजेंसी संचालक पर कोई एक्शन लिया गया। एजेंसी संचालकों की लापरवाही के कारण है कि उज्जवला योजना के ९० प्रतिशत हितग्राही रिफलिंग कराने नहीं आ रहे हैं।
शहर के अलावा ग्रामीण परिवेश में भी काफी बदलाव आ गया है। अब गृहणियां लकड़ी के चूल्हा में धुएं के बीच भोजन बनाना नहीं चाहती।
Published on:
18 Sept 2018 10:00 pm
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